प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्कूलों के प्रधानाध्यापक आजकल दुकानदारों के तकाजे से परेशान हैं। प्रधानाध्यापकों ने स्वेटर खरीद कर बच्चों को पहना तो कर दिए, लेकिन अभी तक भुगतान नहीं हुआ है। वित्तीय साल खत्म होने की कगार पर है। उधारी की रकम फंसने की डर से दुकानदार प्रधानाध्यापकों से भुगतान करवाने का दबाव बना रहे हैं। प्रधानाध्यापकों ने बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय के बाद अब शिक्षक संघ से भुगतान करवाने की गुहार लगाई है।
सरकारी स्कूलों में बच्चों को निशुल्क यूनिफार्म, जूता, बस्ता और स्वेटर वितरण होता है। मौजूदा शिक्षा सत्र में अक्तूबर माह में बच्चों को स्वेटर बांटे गए थे। स्वेटर वितरण सितंबर में होना था। अक्तूबर में प्रति स्वेटर 200 रुपये बजट स्वीकृत हुआ। पहली किश्त के रूप में प्रति स्वेटर 90 रुपये स्कूलों के खातों में ट्रांसफर हुई। निदेशालय ने आश्वासन दिया कि स्वेटर खरीद होते ही बकाया धनराशि का भुगतान भी हो जाएगा। प्रधानाध्यापकों ने अपने स्तर पर दुकानों से उधारी में स्वेटरों की खरीद की और बच्चों को पहनाए। मुरादाबाद जिले में करीब 18 करोड़ का स्वेटर का बकाया भुगतान होना है।
उधारी में स्वेटर देने वाले दुकानदार कई बार बकाया भुगतान का तकाजा कर चुके हैं। बीएसए कार्यालय भी बकाया भुगतान के लिए निदेशालय को पत्राचार कर चुका है। बावजूद इसके 110 रुपये प्रति स्वेटर की बकाया भुगतान की धनराशि जारी नहीं हुई है। वित्तीय साल का अब एक महीना बाकी है। दुकानदार बकाया भुगतान के लिए प्रधानाध्यापकों पर दबाव बना रहे हैं। कई प्रधानाध्यापकों ने तकाजे से परेशान होकर फोन उठाना तक बंद कर दिया है। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ ने शिक्षा निदेशालय से बकाया भुगतान कराए जाने की मांग की है।
कई शिक्षकों ने जेब से किया भुगतान
दुकानदारों के तकाजे से परेशान कई प्रधानाध्यापकों ने जेब से बकाया भुगतान किया है। कई स्कूलों में छात्र संख्या कम है। ऐसे स्कूलों के कई प्रधानाध्यापकों ने अपनी जेब से भुगतान कर दिया है। उनका कहना है कि शासन ने बकाया धनराशि आने पर वो समायोजन कर लेंगे।