महानगर का विकास गुजरात के अहमदाबाद की तर्ज पर किया जाएगा। नगर निगम के अधिकारी और महापौर चार दिन तक अहमदाबाद में रुककर वहां के विकास को देखकर आए हैं। सिटी लीडर शिप और अमृत योजना पर आधारित गोष्टी में विशेषज्ञों ने शहर का विकास अत्याधुनिक तकनीक के आधार पर करने पर जोर दिया।
अहमदाबाद से लौटकर नगर निगम के मुख्य अभियंता सुनील कुमार केसरी ने बताया कि वहां पर अत्याधुनिक तकनीक वाला सीवर ट्रीटमेंट प्लांट लगा हुआ है। वह पानी को 500 से ज्यादा, 500 से कम और 50 से कम टीडीएस वाली श्रेणी में अलग करके निकालता है। पांच से कम और ज्यादा वाले पानी की सप्लाई इंडस्ट्रियल एरिया में की जाती है, जबकि 50 से कम वाला पानी पार्कों और कार वाशिंग आदि के काम आता है। विशेषज्ञों ने सीवर के साफ किए गए पानी को पीकर भी दिखाया। घरों में पीने के पानी की सप्लाई की लाइन अलग हैं, इसमें सुबह-शाम सप्लाई आती है। जबकि कपड़ों की धुलाई व घर की सफाई आदि के अन्य काम के लिए अलग पाइपलाइन से 50 टीडीएस से कम वाले सीवर केपानी को सप्लाई किया जाता है। वेस्ट निस्तारण प्लांट से उर्वरक और डीजल भी बनाया जा रहा है। नगर निगम के प्रत्येक जोन में डंपिंग सेंटर बना है। लोग अपने मकानों का मलबा आदि यहीं पर डालते हैं। उससे नगर निगम ईंट व कंक्रीट तैयार कराकर प्रयोग करता है। इसी विधि को महानगर में लागू करने की तैयारी है।
अहमदाबाद जैसी ताकतवर नहीं बन पाएगी नगर निगम
महानगर में जहां सीवरेज और ड्रेनेज की समस्या है, वहीं अहमदाबाद अत्याधुनिक श्रेणी का ताकतवर शहर है। अहमदाबाद के नगर आयुक्त के अधिकार क्षेत्र में अस्पताल, मेडिकल कालेज, विद्यालय और यातायात की व्यवस्था संभालता है। विकास प्राधिकरण का काम भी निगम के पास है। अहमदाबाद का विकास बजट मुरादाबाद के कुल बजट से सौ गुना है। इसके बावजूद अधिकारियों का प्रयास है कि मुरादाबाद को अहमदाबाद के विकास डिजाइन पर आगे बढ़ाया जाए।