सौर ऊर्जा से बनाएं बिजली, सरकार खरीदेगी
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बिजली संकट दूर करने के लिए प्रदेश सरकार ने तैयार की योजना, नेडा को दी जिम्मेदारी
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2022 तक गैर परंपरागत स्रोतों से 30 फीसदी बिजली पैदा करने का लक्ष्य
अपनी जमीन पर अपने खर्चे से लोग कर सकते हैं बिजली का उत्पादन
नेडा की मध्यस्थता में बिजली कंपनियां करेंगी खरीद, रेट अभी तय नहीं
अभी पांच मेगावाट उत्पादन की है योजना, दो करने पर चल रहा विचार
अमर उजाला ब्यूरो
मुरादाबाद। बिजली संकट दूर करने के लिए प्रदेश सरकार ने पब्लिक को बिजली उत्पादन से जोड़ने की योजना तैयार की है। कोई भी व्यक्ति अपनी जमीन पर अपने खर्चे से सोलर सिस्टम लगाकर सौर ऊर्जा से पांच मेगावाट तक बिजली उत्पादन कर सकता है। नेडा की मध्यस्थता में बिजली कंपनियां बिजली खरीदेंगी। बिजली का रेट अभी सरकार ने तय नहीं किया है। योजना के तहत अभी तक बिजली उत्पादन की मात्रा पांच मेगावाट तय की गई है, लेकिन इस मात्रा को दो मेगावाट तक करने का विचार किया जा सकता है, जिससे कम जमीन और कम लागत में बिजली का उत्पादन किया जा सके। प्रोजेक्ट लगाने की जमीन कृषि भूमि नहीं होनी चाहिए। प्रदेश सरकार ने योजना को हरी झंडी देते हुए नेडा को इच्छुक व्यक्तियों को तलाशने के निर्देश दिए हैं।
उत्तर प्रदेश में बिजली संकट बड़ी समस्या है। इसका असर जनमानस के साथ कारोबार पर पड़ रहा है। मांग के अनुसार बिजली का उत्पादन नहीं हो रहा। सरकार ने विकल्प तलाशते हुए गैर परंपरागत स्रोतों से बिजली उत्पादन की करने की योजना तैयार की है। इसके लिए पब्लिक को योजना से जोड़ा गया है। हाल ही में नेडा की निदेशक संगीता सिंह ने प्रदेशभर के अधिकारियों के साथ इस योजना को मूर्त रूप देने के निर्देश दिए। मुरादाबाद के परियोजना अधिकारी पीडी गुप्ता ने बताया कि प्रदेश सरकार की ओर से इस योजना को हरी झंडी दे दी गई है। सरकार का लक्ष्य 2022 तक गैर परंपरागत स्रोतों से 30 फीसदी बिजली उत्पादन का है।
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35 करोड़ में रोजाना पैदा होगी पांच मेगावाट बिजली
मुरादाबाद। नेडा के परियोजना अधिकारी पीडी गुप्ता ने बताया कि सोलर सिस्टम से एक मेगावाट बिजली पैदा करने के लिए करीब सात करोड़ रुपये खर्च होते हैं। इस तरह पांच मेगावाट बिजली पैदा करने के लिए सोलर सिस्टम 35 करोड़ रुपये में लगेगा। इसके लिए करीब 15 हेक्टेयर जमीन चाहिए। भूमि कृषि योग्य न हो। सरकार दो मेगावाट के सिस्टम लगाने पर भी विचार कर रही है, जिससे कम जमीन और कम खर्च में सिस्टम लगाया जा सके। बिजली के रेट तय करने के लिए प्रदेश सरकार और बिजली कंपनियों में बातचीत होना शेष है।
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सरकारी भवनों को ग्रिड से जोड़ा
मुरादाबाद। सरकारी भवनों को गैर परंपरागत स्रोतों से बिजली मुहैया कराने के लिए सरकार प्रयासरत है। इसके तहत भवनों में सोलर सिस्टम लगाए गए हैं। स्पेशल मीटर लगाकर सोलर सिस्टम को ग्रिड से जोड़ा गया है, जिससे भवनों में बिजली खपत न होने पर पैदा हुई बिजली सीधे ग्रिड को चली जाए। मुरादाबाद के विकास भवन में 25 किलोवाट और कलेक्ट्रेट में 30 किलोवाट के रूफ टॉप ऑन ग्रिड सोलर पावर सिस्टम लगाए गए हैं। दोनों सोलर सिस्टम को ग्रिड से जोड़ा गया है। अब दोनों भवन परंपरागत बिजली पर निर्भर नहीं हैं।