मुरादाबाद। जिले में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2026 तक जिले में 1.57 लाख से अधिक नवजातों की स्क्रीनिंग की गई। 110 बच्चों में जन्मजात गंभीर बीमारियां और शारीरिक दोष मिले, लेकिन इनमें से 25 बच्चों का इलाज अब तक अधूरा पड़ा है। क्लब फुट यानी टेढ़े पंजो वाली बीमारी के 56 बच्चे चिन्हित हुए। इनमें 55 का इलाज हुआ, जबकि एक बच्चा अब भी इंतजार में है।
वहीं दिल की जन्मजात बीमारी (सीएचडी) से पीड़ित 18 बच्चों में केवल 9 का इलाज हो सका। 9 बच्चे अब भी सिस्टम की सुस्ती झेल रहे हैं। कटे होंठ (क्लेफ्ट लिप) के 23 मामलों में सिर्फ 11 बच्चों का उपचार हो पाया, जबकि 12 बच्चे अब भी उपचार से दूर हैं। आंकड़ों के मुताबिक जिले में 15,741 संस्थागत प्रसव हुए। इनमें 27 नवजातों में जन्मजात दोष पाए गए। मोबाइल हेल्थ टीमों ने 4.21 लाख से अधिक बच्चों की जांच की, जिसमें 62 नए मामलों का पता चला। कुल मिलाकर 110 बच्चों को गंभीर श्रेणी में चिन्हित किया गया। ब्लॉकवार स्थिति देखें तो महिला अस्पताल में सबसे ज्यादा 23 बच्चे जन्मजात दोष से प्रभावित मिले। कांठ, ताजपुर और भोजपुर ब्लॉक में भी स्थिति लगभग समान रही। आरबीएसके के नोडल अधिकारी डॉ. प्रवीण श्रीवास्तव का कहना है कि जन्मजात दोषों के मामले में बच्चों को लगातार उपचार दिया जा रहा है। छूटे बच्चों को मई में उपचार दिया गया है।