मुरादाबाद। करोड़ों खर्च के बाद भी तालाबों की हालात नहीं बदल पाई। इन तालाबों के किनारे अब न तो परिंदे रैन बसेरा बनाते और न ही पशुओं का झुंड यहां से गुजरता नजर आता। धीरे धीरे इन तालाबों पर कब्जा हो रहा है। लोगों ने तालाबों में ही खेतीबाड़ी शुरू कर दी। मुरादाबाद तहसील के फाजलपुर गांव तो एक बानगी है। जनपद कें अधिकांश गांवों की ऐसी ही हालात हो चुकी है। लोगों का कहना है कि अब तो बस मानसून का ही इंतजार है।
नगर निगम की हद में आने वाले फाजलपुर गांव की आबादी तकरीबन तीन हजार से है। अधिकांश परिवार खेतीबाड़ी पर ही निर्भर हैं। गांव और गांगन नदी के बीच तीन तालाब है। तीनों तालाब सूख गए। इन तालाबों में पहले साल भर पानी भरा रहता था। जिसमें दुधारू पशु नहलाने से उसकी सेहत भी अच्छी रहती थी और दूध भी ज्यादा देते थे। खेतों में नमी रहती थी। जिससे खेतों में फसल अच्छी लहराती थी। जैसे जैसे तालाब सूखते गए और खेतों की नमी भी गायब होने लगी है। लगातार जल स्तर में गिरावट आ रही है। इन तालाबों की हालात बदलने के बड़े बड़े दावे किए गए थे। अफसरों की टीम मौके पर पहुंची थी और तालाबों का निरीक्षण भी किया गया था, लेकिन इन तालाबों में पानी का कोई प्रबंध नहीं हो सका। साल दर साल तालाबों छोटे होते जा रहे हैं। तालाबों में पानी न होने के कारण लोग अपने पशु हैंडपंप और सबमर्सिबल पर नहाने को मजबूर हैं।
एक तालाब की हालत सुधरी, दूसरे पर कब्जा, कुएं भी सूखे
मुरादाबाद। फाजलपुर गांव के इर्द गिर्द पांच तालाब थे। तीन तालाब सूख चुके हैं। एक तालाब की हालत सुधर चुकी है। जबकि एक तालाब पर कुुछ लोगों ने धीरे धीरे कब्जा शुरू कर दिया है। इस गांव में रहने वाले चिरंजी लाल का कहना है उनका अपना निजी तालाब था। जिसे आवास विकास ने खरीद लिया है। इस तालाब का आवास विकास की ओर से सुंदरीकरण किया जा चुका है। फिलहाल ये तालाब भी सूख चुका है, जबकि पांचवें तालाब पर धीरे धीरे कब्जा कर लिया गया है। इसके अलावा लोगों ने कुएं भी बंद कर दिए हैं। गांव के पास ही गजराम सिंह का कुंआ था। जिस पर लोग पानी पीते थे और खेतों की सिंचाई भी होती थी। इसके प्रीतम ने भी चालीस चाल पहले अपना कुएं बंद कर दिया ।
फाजलपुर गांव के तालाबों का सर्वे कराया जाएगा। अगर किसी तालाब पर किसी का कब्जा मिला तो उसे मुक्त कराया जाएगा और कब्जा कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई कराई जाएगी। सर्वे के बाद ही पता चलेगा कि तालाबों की क्या हालात है।
संजय चौहान, नगर आयुक्त नगर निगम
गांव के पास ही हमारा तालाब था। तालाब की जमीन को आवास विकास ने खरीद लिया है। आवास विकास ने कुछ और लोगों की जमीन खरीद कर वहां बड़ा तालाब बना दिया है।
चिरंजी लाल
गांव के तालाबों में अब पानी नहीं रहता। जिस कारण लोग अपने पशु हैंड पंप और सबमर्सिबल पर ही नहलाने को मजबूर हैं। खेतों में सिंचाई करने के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है।
हरप्रसाद ग्रामीण
गांव के सभी तालाब सूख गए हैं। इन तालाबों में लोगों ने अब खेतीबाड़ी शुरू कर दी है। तालाबों की सफाई के लिए कई बार जिला प्रशासन से मांग की जा चुकी है, लेकिन तालाबों पर कोई काम नहीं हो पाया है। दोबारा मांग की जाएगी। ताकी तालाबों की हालात में सुधर हो सके। तालाब में पानी रहेगा तो खेतों में भी नमी बनी रहेगी। इससे फसल अच्छी पैदा होती है।
अशोक कुमार सैनी
पहले हम कुएं से खेतों की सिंचाई करते थे। चालीस साल पहले ही कुएं बंद कर दिए हैं। तालाब भी सूख गए हैं। पानी न होने की वजह से सबसे ज्यादा दिक्कत पशुओं को नहलाने और पानी पिलाने की होती है। इन तालाबों पर संबंधित अधिकारियों को ध्यान देना चाहिए।
प्रीतम
तालाब सूख चुके हैं। अब तो मानसून का ही इंतजार है। बारिश होने से तालाब में पानी भर पाएगा। पहले पूरे साल तालाबों में पानी रहता था। लोग अपने पशु तालाब में नहलाने ले जाते थे।
साधु राम