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गोल्डन कार्ड बनाने में मुरादाबाद प्रदेश में तीसरे नंबर पर

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मुरादाबाद।
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आयुष्मान बीमा योजना में गोल्डन कार्ड जारी करने में मुरादाबाद ने उत्तरप्रदेश में तीसरे पायदान पर जगह बनाई है। जिले में 19618 गोल्डन कार्ड जारी हो चुके हैं। इनमें 450 लोगों ने कैश लेस इलाज कराया है।
बीमा योजना में मुरादाबाद जिले में एक लाख 38 हजार परिवार कवर हैं। चिह्नित परिवारों के गोल्डन कार्ड बनाने के लिए 28 कियोस्क बनाए गए हैं। इनमें तीन कियोस्क सरकारी अस्पतालों में हैं। निजी अस्पतालों के कियोस्क से बीमा योजना में चिह्नित मरीज के भर्ती होने पर ही कार्ड जारी किया जा रहा है। जबकि सरकारी अस्पतालों के कियोस्क से गोल्डन कार्ड बनवाने वालों की लाइन लगती है। जिला समन्वयक इरशाद अली के मुताबिक मुरादाबाद जिला गोल्डन कार्ड जारी करने में उत्तर प्रदेश में तीसरे स्थान पर है। मुरादाबाद में 19618 कार्ड जारी हुए हैं। इलाहाबाद 36915 गोल्डन कार्ड जारी करने के साथ पहले और बनारस 23068 कार्ड जारी कर दूसरे स्थान पर है। जिला समन्वयक इरशाद अली ने बताया कि कार्ड जारी होने के बाद 450 लोग इलाज करवा चुके हैं। 90 फीसदी लोगों ने योजना से अनुबंधित निजी अस्पतालों से इलाज कराया है। इनमें कई मरीजों ने हार्ट का आपरेशन कराया है।
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आयुष्मान मित्रों की नहीं हुई तैनाती
सरकारी अस्पतालों में खुले कियोस्क में आयुष्मान मित्रों की तैनाती होनी है। लेकिन अभी तक तैनाती नहीं होने से अस्पताल के कर्मियों को कियोस्क काउंटर ड्यूटी पर लगाया गया है। निजी अस्पतालों में कियोस्क का संचालन अस्पताल कर्मी ही कर रहे हैं।

गोल्डन कार्ड के बाद भी नहीं मिला इलाज, हुई मौत
मुरादाबाद। बीमा योजना से अनुबंधित कई निजी अस्पताल मरीज भर्ती करने में आनाकानी कर रहे हैं। मरीजों से चार्ज वसूला जा रहा है। ऐसा ही एक मामला कंट्रोल रूम में शिकायत दर्ज कराने पर सामने आया है।
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लाइनपार, शिवाजी नगर निवासी नरेश के मुताबिक उसकी मां विद्या देवी (65) बीमार थीं। उसके पेट में पानी भरा था। विद्या देवी को जिला अस्पताल में भर्ती कराया। चिकित्सकों ने विद्या देवी को अनुबंधित निजी अस्पताल में आपरेशन कराने की सलाह दी। नरेश के मुताबिक उसने 21 दिसंबर को मां को जिला अस्पताल से डिस्चार्ज करवा लिया और दिल्ली रोड के एक निजी अस्पताल ले गया। अस्पताल प्रबंधन ने ओपीडी की फीस वसूलने के साथ आपरेशन खर्च जमा करने को कहा। गोल्डन कार्ड दिखाने पर अस्पताल प्रबंधन ने कहा कि सिर्फ बेड का चार्ज नहीं देना होगा। नरेश के मुताबिक निजी अस्पताल के कैश लेस इलाज कराने से इंकार करने पर वह मां को लेकर फिर जिला अस्पताल पहुंचा। 25 दिसंबर को मां को डिस्चार्ज करवाकर घर ले गया और 27 को मौत हो गई। नरेश ने इसकी शिकायत आयुष्मान योजना के कंट्रोल रूम में की। जिसकी जांच शुरू हो गई है।
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