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कड़ाके की ठंड से मोहनपुर में एक ग्रामीण की मौत-Cordination

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बिलारी/कुंदरकी।
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मोहनपुर गांव के इरफान का नाम हर सरकारी योजना के लाभार्थियों की सूची में दर्ज था लेकिन उसे एक भी योजना का लाभ नहीं मिला। यहां तक कि दो दिन पहले तहसील में कंबल बांटे गए और उसका नाम भी कंबल लेने वालों की सूची में दर्ज था लेकिन जानकारी तक नहीं दी गई। जबकि गांव के 10 लोग तहसील से कंबल ले आए थे। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री आवास के लिए उसका नाम सूची में शामिल था लेकिन उसको मकान बनाने के लिए रुपये नहीं मिले। और आखिरकार सरकारी योजनाओं में देरी के कारण इरफान की मौत हो गई।
ग्रामीणों का कहना है कि समय से सरकारी योजनाओं का लाभ पीड़ित परिवार को मिल जाता तो शायद इस तरह की दुखद घटना न देखनी पड़ती। अब प्रशासन की ओर से मजदूर के परिवार उन सभी तरह की सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की कवायद की जा रही है जोकि बहुत पहले मिल जानी चाहिए थे। सरकारी इमदाद न मिलने के बाद पीड़ित परिवार को आर्थिक मदद प्रदान करने के लिए गैर सरकारी संस्थाएं आगे आईं। तहसील स्टाफ के अनुरोध पर ईंट भटटा एसोसिएशन के अध्यक्ष, मोहनपुर गांव के प्रधान ने आर्थिक मदद उपलब्ध कराई है।
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इरफान की मौत के बाद डीएम ने एडीएम से ली रिपोर्ट
बिलारी। डीएम राकेश कुमार सिंह ने ठंड से इरफान की मौत के बाद एडीएम वित्त को जांच के आदेश दिए और शाम तक रिपोर्ट मांगी। एडीएम ने प्रीति जायसवाल ने पीड़ित परिवार के घर पहुंचकर जानकारी जुटाई। बाद में मोहनपुर गांव के घराें में जाकर यह जायजा लिया कि कड़ाके की ठंड से बचाव के पुख्ता इंतजाम हैं या नहीं। यह भी जानकारी ली कि उन्हें तहसील प्रशासन की ओर से कंबल मिले हैं या नहीं। नियमित अलाव जलवाने की व्यवस्था है या नहीं। बाद में एडीएम ने तहसील बिलारी के अधिकारियाें को पूरे प्रकरण की रिपोर्ट बनाकर भेजने के निर्देश दिए ।

दैवीय आपदा से नहीं मिलेगी रकम: एसडीएम
बिलारी। एसडीएम कुंवर पंकज ने बताया कि मृतक इरफान की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बिना शासन की ओर से मिलने वाली आर्थिक मदद दिलाया जाना संभव नहीं है। एसडीएम के मुताबिक परिजनाें को काफी समझाने के बाद भी वह शव का पोस्टमार्टम कराने के लिए तैयार नहंी हुए। पोस्टमार्टम के अभाव में मृत्यु का सही कारण ज्ञात न होने पर दैवीय आपदा के तहत सहायता राशि दिया जाना संभव नहीं है। एसडीएम ने बताया कि राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के तहत शीघ्र ही मृतक के आश्रिताें को तीस हजार रूपये की सहायता दिलाई जा रही है। मुख्यमंत्री राहत कोष से सहायता धनराशि प्रदान करने के लिए अलग से आख्या भेजी जा रही है।

छह वर्ष पहले मिला था आवासीय पटटा
बिलारी। तहसीलदार राजेश कुमार का कहना है कि मृतक इरफान के पिता मौहम्मद जान की लगभग बारह वर्ष पहले मृत्यु हो जाने के बाद इरफान अपनी मां के साथ बिहार चला गया। वर्ष 2010 में जब वह गांव में वापस आया तब सात अप्रैल 2012 को गाटा संख्या 236 में से सौ वर्ग गज का आवासीय पटटा इरफान को दिया गया था। उसके कमरे की दीवारें पक्की हैं और छत कच्ची है। ब्लाक कुंदरकी की ओर से मृतक के घर शौचालय बना हुआ है और मृतक की पत्नी नफीसा के नाम पात्र गृहस्थी का राशन कार्ड भी बना हुआ है। तहसीलदार ने बताया कि जांच के दौरान पता चला है कि इरफान सांस की बीमारी से पीड़ित था। यह पुष्टि डा. पूजा बंसल ने की है, यह तथ्य उसकी पत्नी नफीसा खातून ने भी अपने बयानों में स्वीकारा है।

कागजों में जल रहे हैं अलाव
बिलारी। एक पखवाड़े पहले से कड़ाके की ठंड शुरू होने के बावजूद प्रत्येक गांव की बजाय बड़ी आबादी वाले गिने चुने ग्रामों में ही तहसील प्रशासन के अलाव जल रहे हैं। हालांकि तहसील प्रशासन का दावा है कि बिलारी और कुंदरकी क्षेत्र के सार्वजनिक स्थानाें के अलावा अधिक आबादी वाले गांवों सहित बारह स्थानाें पर सुबह और शाम नियमित अलाव जलवाये जा रहे हैं जिनका पर्यवेक्षण हलका लेखपाल कर रहे हैं। ग्राम पंचायताें की ओर से ग्राम स्तर पर सार्वजनिक रूप से अलाव जलवाने की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। ब्लाक अधिकारियाें का कहना है कि ठंड से बचाव को अलाव जलवाने के लिए अलग से कोई फंड नहीं मिला है।

तीन हजार और कम्बल मांगे
बिलारी। तहसील अधिकारियाें ने तीन हजार और कंबल जिला प्रशासन से मांगे हैं। अब तक एक सार्वजनिक कार्यक्रम में छह सौ कंबल बांटे गए थे बाद में हलका लेखपालाें के माध्यम से ग्राम प्रधानाें की मौजूदगी में प्रत्येक गांव में दस दस कंबल बंटवाए गए। एसडीएम कुंवर पंकज ने बताया कि जिला प्रशासन को मांग पत्र भेजकर तीन हजार और कंबल मांगे गए हैं जिनके आते ह्री पात्र लोगाें में कंबलों का वितरण किया जाएगा।

पीड़ित परिवार को दैवीय आपदा की मदद नहीं मिल सकेगी
कुंदरकी। पीड़ित परिवार को आर्थिक मदद दिलाने के लिए तहसीलदार राजेश कुमार ने रिपोर्ट तैयारी कर ली है। जिसमें तहसीलदार ने कहा है कि मजदूर के शव को पोस्टमार्टम न कराने के कारण दैवीय आपदा मद से चार लाख रुपये नहीं मिल सकेंगे। सरकार के आदेश हैं कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर ही इस मद में आर्थिक सहायता प्रदान की जा सकती है। इसीलिए डीएम की ओर से शासन को विशेष अनुरोध किया है। फिलहाल प्रशासन पीड़ित परिवार को राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के तहत 35 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दिलाने के प्रयास कर रहा है। वहीं मुख्यमंत्री राहत कोष से आर्थिक मदद दिलाने को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
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आंगनबाड़ी केंद्र पर बनाया रैन बसेरा
कुंदरकी। मोहनुपर गांव में कड़ाके की ठंड से कोई और गरीब की जान न जाए। इसीलिए आंगनबाड़ी केंद्र भवन पर रैन बसेरा बनाया गया है। तहसीलदार ने बताया कि आवश्यकता पर गरीब परिवार इस रैन बसेरा में रह सकता है। रैन बसेरा की निगरानी की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव और लेखपाल की दी गई।
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