हादसों में कमी लाने के लिए हाईवे पर मालवाहक वाहनों की रफ्तार में कमी लाने का निर्णय लिया गया है। रफ्तार पर लगाम लगने को परिवहन विभाग ने इसके लिए वाहनों की गति निर्धारित कर दी है। अब ट्रक और बसों सहित मालवाहक वाहन 60 किमी की गति से ज्यादा नहीं चल सकेंगे। आरटीओ ने संभाग के जिलों में इनकी फिटनेस रोक दी गई है।
हाइवे पर ज्यादातर हादसे वाहनों की तेज गति के कारण होते हैं। ट्रक और डंपर वजन लदा होने केबाद तेज गति में एकाएक नियंत्रित भी नहीं हो पाते हैं। परिवहन विभाग के विशेषज्ञों का मानना है कि जल्दी पहुंचने के प्रयास में मालवाहक वाहनों के चलाते तेज गति से चलते हें। साइड लगने और हादसा होने पर नुकसान भी दूसरे वाहनों को ही ज्यादा होता है। उसके चलते सड़क हादसों में कमी लाने के लिए ट्रकों की गति 60 किमी प्रति घंटा तय करने की तैयारी कई महीने से की जा रही थी। डंपर और बसों की गति पहले ही 60 किमी फिक्स कर दी गई थी।
अब परिवहन विभाग ने ट्रकों में स्पीड गवर्नर लगवाना अनिवार्य कर दिया है। आरटीओ ने मंडल के सभी जिलों में ट्रकों की फिटनेस पर रोक लगा दी है। अब इनको स्पीड गवर्नर लगवाने के बाद ही फिटनेस प्रमाण पत्र दिया जाएगा। इससे सड़कों पर ट्रकों के कारण होने वाले हादसों में कमी आ सकेगी।
ट्रकों में स्पीड गवर्नर का प्रयोग अनिवार्य कर दिया गया है। उसके बिना ट्रकों को फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं दिया जा रहा है। हादसों में कमी लाने के लिए ट्रकों को 60-70 किमी प्रतिघंटा से ज्यादा तेज नहीं चलने दिया जाएगा।
- केपी गुप्ता, संभागीय परिवहन अधिकारी प्रवर्तन।