बाढ़ से दुग्ध उत्पादन में गिरावट आ गई है। चारे की कमी होने और गुणवत्ता में गिरावट का असर दुग्ध उत्पादन पर पड़ रहा है। इसकेसाथ ही पशुओं का स्वभाव भी बदल रहा है। अभी दो सप्ताह तक दूध में कमी का सामना करना होगा।
बारिश और बाढ़ का असर दूध केउत्पादन पर भी पड़ा है। यह मौसम भरपूर दुग्ध उत्पादन का चल रहा है। इस समय पशुओं को अच्छा चारा मिलता है और गर्मी ज्यादा परेशान नहीं करती है। ऐसे में हर साल अगस्त से दूध में बढ़ोतरी शुरू हो जाती है। इस बार जिले को भीषण बाढ़ का सामना करना पड़ा है। बाढ़ से ज्यादातर पशुओं को पूरा आराम नहीं मिल रहा है। लगातार बारिश के चलते पशुओं का स्वभाव बदला है। इसकेसाथ ही बाढ़ से चारे की कमी हो गई है। पानी में से काटकर लाए जा रहे चारे में मिट्टी मिली रहती है। जिससे पशु भूखे रह जाते हैं। इसका असर भी दूध केउत्पादन पर पड़ता है। जिले में मौजूदा समय में 3.55 लाख लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। पराग के जीएम आरएस राणा ने बताया कि यदि बारिश और बाढ़ की परेशानी नहीं आती तो अब साढ़े चार लाख लीटर से ज्यादा दूध का उत्पादन होता। अभी हालात को सामान्य होने में दो सप्ताह का समय लग सकता है। पराग के पास 40 लाख लीटर दूध की उपलब्धता है।