भू माफिया यूसुफ ने पूर्व डीएम पर जड़े आरोप
भू माफिया थे पूर्व डीएम, कलक्टरी को कर गए बदनाम - हेडिंग
यूसुफ ने कहा- पूर्व डीएम की कर दी थी शिकायत लिहाजा भू माफिया बना गए
पुलिस ने दर्ज की है यूसुफ मलिक के खिलाफ गुंडा एक्ट की रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो
मुरादाबाद।
भू माफिया घोषित होने के बाद तिलमिलाए सपा नेता यूसुफ मलिक ने मुरादाबाद के एक पूर्व डीएम पर तमाम संगीन आरोप जड़े हैं। भू माफिया यूसुफ ने आरोप लगाया है कि सही मायनों में तो पूर्व डीएम ही जिले के इकलौते भू माफिया थे। जिन्होंने कलेक्टर की कुर्सी पर बैठकर जमीनों का धंधा किया। एमडीए की जमीनों को भी कब्जाने से नहीं छोड़ा और अपने नाते - रिश्तेदारों तक के नाम से जमीनें खरीद डालीं। हालांकि यूसुफ ने पूर्व डीएम पर जो आरोप लगाए हैं उनमें नया कुछ नहीं है, अधिवक्ता दुष्यंतराज चौधरी तीन माह पहले ही मय कागजों के इन बातों को उजागर कर चुके हैं।
एंटी भू माफिया टास्क फोर्स की रिपोर्ट के आधार पर हरथला निवासी सपा नेता यूसुफ मलिक को भू माफिया घोषित किया गया है। सिविल लाइंस पुलिस ने यूसुफ के खिलाफ जमीनों पर कब्जा करने और गुंडागर्दी करने के मामले में रिपोर्ट भी दर्ज कर ली है। पुलिस का कहना है कि यूसुफ की लंबी क्राइम हिस्ट्री है और उसके भाइयाें का भी आपराधिक इतिहास है। पुलिस के मुताबिक यूसुफ लोगों को डरा धमकाकर और गुंडागर्दी के बूते जमीनों पर कब्जा करता है। सिविल लाइंस इंस्पेक्टर के मुताबिक यूसुफ द्वारा जमीनों पर कब्जे करके और अपराध के जरिए जुटाई गई संपत्ति को विवेचना के बाद जब्त किया जाएगा।
इधर, खुद को भू माफिया घोषित किए जाने के अगले दिन प्रेस के सामने आए यूसुफ मलिक ने जिले के एक पूर्व डीएम पर जमकर आरोप लगाए। यूसुफ ने प्रेस कांफ्रेंस करके दावा किया कि उन्हाेंने पूर्व डीएम की शिकायत तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से कर दी थी, जिससे नाराज होकर वह उन्हें भू माफिया लिस्ट में डाल गए। यूसुफ ने दावा किया कि पूर्व डीएम ने अपनी बहन और नाते रिश्तेदारों के नाम से मुरादाबाद में जमीनें खरीदीं और कलक्टर की कुर्सी का दुरुपयोग किया। भू माफिया बनने के बाद तिलमिलाए यूसुफ ने कहा कि यदि जिले में कोई भू माफिया बनाए जाने के लिए सबसे उपयुक्त नाम था तो वह पूर्व डीएम का था।
एडवोकेट दुष्यंत कर चुके हैं खुलासा
मुरादाबाद। भू माफिया व सपा नेता यूसुफ मलिक ने गुरुवार को जो आरोप पूर्व डीएम पर लगाए हैं उनका खुलासा एडवोकेट दुष्यंतराज चौधरी पहले ही कर चुके हैं। तीन माह पहले ही दुष्यंत ने प्रेस कांफ्रेंस करके पूर्व डीएम द्वारा अपने रिश्तेदारों के नामों पर खरीदी गई जमीनों के दस्तावेज सामने रखे थे। यूसुफ ने अब इन्हीं दस्तावेजों को सामने रखकर नए खुलासे का दावा किया है। यूसुफ का यह भी दावा है कि पूर्व डीएम की शिकायत उन्होंने ही तत्कालीन सीएम से की थी।
कानून की किताब में नहीं है माफिया का वजूद
- आईपीसी में कहीं नहीं है माफिया टर्म का इस्तेमाल
मुरादाबाद।
माफिया कौन है? इसकी परिभाषा क्या है? किसी को नहीं मालूम। दरअसल कानून की किताब में कहीं भी माफिया शब्द का जिक्र नहीं है। वास्तव में माफिया एक ईरानी शब्द है। ईरान में बंदूक के दम पर जुआ कराने वालों को माफिया कहा जाता था। अपने देश में आईपीसी या कानून की किसी भी किताब में माफिया शब्द का वजूद ही नहीं है। गुंडा एक्ट और गैंगस्टर तो है लेकिन कानून में कहीं भी माफिया का वजूद नहीं है। लेकिन सरकार ने माफिया को लेकर ऐलान क्या किया, पुलिस - प्रशासन में बैठे कुछ लोगों ने हर किसी को माफिया का खौफ दिखाकर वसूली का धंधा शुरू कर दिया है। स्थिति यह है कि खनन करने वाले को खनन माफिया, शराब का काम करने वाले को शराब माफिया, ट्यूशन पढ़ाने वाले को शिक्षा माफिया, ई कचरे का धंधा करने वाले को ई कचरा माफिया, ठीकठाक ठेकेदारी करने वालों को ठेकेदार माफिया, चार - छह प्लाट खरीद लेने वालों को भू माफिया, राशन के धंधे में लगे लोगों को राशन माफिया बनाने की धौंस मिल रही हैं। पुलिस - प्रशासन ने बेशक लोगों को माफिया बना दिया है कि लेकिन यदि मामला कोर्ट की दहलीज तक पहुंचा तो यही माफिया शब्द पुलिस - प्रशासन के गले की फांस भी बन सकता है। क्योंकि कानून की नजर में माफिया शब्द का वजूद ही नहीं है।
बंदूकों के दम पर जमीनें कब्जाने वाले महफूज
मुरादाबाद। सही मायनों में कोई माफिया है तो पब्लिक की नजर में वो माफिया हैं जो सरेआम दिनदहाड़े फर्जी कागज तैयार कराकर बंदूकों के दम पर या कोर्ट से स्टे के बहाने पब्लिक व सरकार की जमीनों पर कब्जे करते हैं। माफिया गैंग बनाकर रहते हैं और जुर्म, कब्जे, खून खराबा, फिरौती, अपहरण, हत्या व फर्जी कागज बनाकर लोगों की प्रापर्टी हड़पने समेत यह ऐसे तमाम गलत काम करते हैं जिससे इनके दुश्मनों की लंबी लिस्ट बन जाती है। यही वजह है कि माफिया को अपनी जान का खतरा दिखने लगता है और अपनी जान पर मंडराते खतरे को देखते हुए ये हमेशा बंदूकों के साए में ही घर से निकलते हैं। ये काले शीशे की कारों में घूमते हैं। ये कभी घर से अकेले नहीं निकलते, गैंग के साथ बंदुूकों के साए में चलते हैं जिससे पब्लिक में इनका डर बैठ जाता है। खास बात यह है कि सरेआम पब्लिक व सरकारी की जमीनों पर कब्जा करने वाले इन माफियाआें को हर सरकार में लोकल नेताओं का संरक्षण हासिल रहता है। लिहाजा कोई इन्हें टच नहीं कर पाता। मुरादाबाद में भी ऐसे गैंग हैं जो फर्जी कागजों के बूते बंदूकों के दम पर पब्लिक की जमीन कब्जाते हैं और फिर समझौते के नाम पर करोड़ों रुपये ‘गुंडा टैक्स’ वसूलते हैं। इन माफिया गैंगों में पुलिस - प्रशासन में बैठे कुछ ओहदेदार भी शामिल होते हैं और हर सरकार में लोकल लीडरशिप का इन्हें संरक्षण रहता है।