भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता का पैमाना बनी ‘कुर्सी’ की चर्चाओं का दौर थम नहीं रहा है।
टेंट कारोबारी भाजपा पार्षद ने कुर्सी को किसी भी कीमत पर बेचने से इनकार कर दिया है। इसके बावजूद कार्यकर्ता बोली लगा रहे हैं।
बुधवार को भी तमाम लोग कुर्सी देखने पहुंचे। एत्मादपुर के एक कार्यकर्ता ने पांच लाख रुपये में कुर्सी खरीदने की पेशकश कर दी।
अब लगने लगा है कि वे खुद को चर्चाओं में लाने के लिए नाटक कर रहे हैं। जबकि पार्टी आलाकमान हिदायत दे चुका है कि इस मामले को आगे न बढ़ाया जाए।
कोठी मीना बाजार में हुई विजय शंखनाद रैली के बाद भाजपा के कार्यकर्ताओं के बीच कुर्सी चर्चा का केंद्र बनी। इसके बाद चर्चा आम हुई तो कुर्सी देश भर में छा गई। मीडिया में मामला आने पर कुर्सी की कीमत लगातार बढ़ने लगी।
मंगलवार को कुर्सी कीमत तीन लाख हो गई थी। ‘कुर्सी’ को लेकर कोई राजनीतिक बखेड़ा खड़ा न हो, इसके चलते प्रदेश नेतृत्व ने मामले को हवा न देने के हिदायत दे डाली। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि यह हास-परिहास का विषय था। गंभीर मामला नहीं है।