शनिवार की दोपहर ताजिये का जुलूस नगर के विभिन्न इमाम चौक से उठाया गया, जुलूस में अखाड़ों की जुगलबंदी साथ-साथ चल रही थी। कतारबद्घ चल रहे ताजियों को देेखने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। नगर क्षेत्र के इमामबाड़ा स्थित कर्बला पर विभिन्न स्थानों से निकाले गए ताजिये को मातमी माहौल में दफन किया गया। जुलूस में चल रहे लोग या हुसैन या अली की सदाएं बुलंद कर रहे थे। इस मौके पर लोगों ने मनकबतख्वानी करके शहीदान-ए-कर्बला को याद किया, जिससेे पूरा माहौल गमगीन हो गया। ताजिये के गुजरने के सभी रास्तों पर खिचड़ा-पुलाव, शर्बत व पेयजल का वितरण किया जा रहा था। ताजिये का जुलूस नगर के संकटमोचन मार्ग सहित वासलीगंज, घंटाघर, कोतवाली रोड, बसनही बाजार, त्रिमोहानी, अकबर खां की गली होते हुए फत्ते खां के बाड़ा पहुंचा, जहां से सभी ताजिये इमामबाड़ा स्थित कर्बला ले जाए गए। इसके पूर्व नगर के तरकापुर, कुरैश नगर, भटवा की पोखरी, पक्की सरांय, रतनगंज, रानीबाग, छोटा मिर्जापुर, गणेशगंज, लालडिग्गी, पूरी कटरा, चेतगंज, बुंदेलखंडी, नटवा, सबरी, हयातनगर, गोसांई तालाब, रमईपट्टी, सबरी, मकरीखोह, डंकीनगंज, भैसहिया टोला, अमानगंज, गजियाटोला, गैवीघाट, वासलीगंज, फतहां आदि स्थानों पर स्थित इमाम चौक से ताजिये का जुलूस मातमी माहौल में निकाला गया। अपने निर्धारित रास्तों से होते हुए ताजिये का जुलूस इमामबाड़ा स्थित कर्बला पहुंचा, जहां ताजिये को दफन किया गया। इस मौके पर पुलिस प्रशासन की तरफ से सुरक्षा-व्यवस्था के चाक-चौबंद इंतजाम किए गए थे। ईदगाह के इमाम मौलाना निसार अहमद ने बताया कि इमाम हुसैन व उनके 72 साथियों ने भूख-प्यास की फिक्र किए बिना हक-ओ-इंसाफ और इस्लाम की सलामती के लिए कर्बला में कुर्बानी दी थी। बताया कि इमाम हुसैन की शहादत से जुल्म के आगे सिर न झुकाने का सबक मिलता है। पुलिस अधीक्षक अरविंद सेन खुद भ्रमण कर स्थिति का जायजा लेते रहे।