पूर्णिमा तिथि पर देवीधाम में मां विंध्यवासिनी देवी के दिव्य स्वरूप का दर्शन-पूजन करने के लिए आस्था का समंदर उमड़ पड़ा। भोर में मंगला आरती के पूर्व से ही मंदिर परिसर व आसपास की गलियों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़नी शुरू हो गई थी। मां की भव्य आरती के उपरांत विंध्यधाम पहुंचे भक्तों ने बड़े ही श्रद्घाभाव से दर्शन-पूजन कर परिवार में सुख-समृद्घि के लिए कामना की। घंटा-घड़ियाल व माता के जयघोष से मंदिर परिसर देवीमय हो रहा था।
आदिशक्ति मां विंध्यवासिनी का दर्शन-पूजन करने के लिए सुबह से ही न्यू वीआईपी व पुरानी वीआईपी रोड सहित कोतवाली गली, बच्चा पाठक गली, जैपुरिया गली, पक्काघाट गली में दर्शनार्थियों की लंबी कतारें लग गई थीं। कतार में माला-फूल, नारियल-चुनरी व प्रसाद लिए श्रद्घालु मां का जयकारा लगाते मंदिर की तरफ बढ़े चले जा रहे थे। माता के पावन दरबार में पहुंचने के बाद नर-नारियों ने विधिवत मां का दर्शन-पूजन कर मंगलकामना की।
मां के दर्शन के बाद श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में विराजमान समस्त देवी-देवताओं की मंदिरों में पहुंच कर पूजन-अर्चन किया। पूर्णिमा पर विंध्य दरबार में मुंडन व जनेऊ संस्कार अनवरत चलते रहे, वहीं जगह-जगह मंत्रोच्चार के बीच साधक साधना करने में मशगूल दिखाई दिए। मां का दर्शन-पूजन करने के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहाड़ पर विराजमान मां काली व मां अष्टभुजी देवी के पावन दरबार में जाकर शीश नवाया। नंगे पांव त्रिकोण परिक्रमा करने के लिए भी श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। पूर्णिमा पर विंध्य क्षेत्र जगत मां विंध्यवासिनी के जयकारे से गुंजायमान हो रहा था।