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Mirzapur News: विंध्य दरबार में कुष्मांडा के स्वरूप की पूजा, हवन कुंड में दी आहूति

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मंगला आरती: मां विंध्यवासिनी का आरती पूजन करते  शृंगारिया।-सोशल मीडिया। - फोटो : ArchivE
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- शारदीय नवरात्र के चौथे दिन मां कुष्मांडा के स्वरूप में मां विंध्यवासिनी का दर्शन कर मांगी सुख-समृद्धि, सुरक्षा व्यवस्था के बीच हुई त्रिकोण परिक्रमा
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विंध्याचल। शारदीय नवरात्र के चौथे दिन बुधवार को मां विंध्यवासिनी के दरबार में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। भोर से देर रात तक मंदिर परिसर माता के जयकारों से गूंजता रहा। पुलिस-प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था के बीच श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान कर मां कुष्मांडा के स्वरूप में मां विंध्यवासिनी का दर्शन-पूजन किया और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
दर्शन के बाद भक्तों ने हवन कुंड में आहुतियां देकर त्रिकोण परिक्रमा शुरू की। कालीखोह मंदिर में मां काली के दर्शन के बाद श्रद्धालु रोपवे और सीढ़ियों के रास्ते अष्टभुजा धाम पहुंचे। यहां लंबी कतारों में इंतजार के बाद भक्तों ने मां अष्टभुजा का दर्शन किया। नवरात्र मेले में श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस-प्रशासन मुस्तैद रहा।
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दिव्यता और भव्यता से जगमगा उठा विंध्य कॉरिडोर
-सिंह द्वार और नक्काशीदार परकोटे की रोशनी बनी आकर्षण, सेल्फी लेते नजर आए श्रद्धालु
विंध्याचल। शारदीय नवरात्र में विंध्य कॉरिडोर की दिव्यता और भव्यता श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही है। सूर्यास्त होते ही विशेष रोशनी से जगमगाते भव्य सिंह द्वार और नक्काशीदार परकोटे की छटा देखते ही बन रही है। नागर शैली में बने कॉरिडोर की सुंदरता रात में अलौकिक नजारा प्रस्तुत कर रही है। कॉरिडोर के निर्माण से विंध्याचल धाम का स्वरूप निखर उठा है। मां विंध्यवासिनी के दर्शन-पूजन के लिए आने वाले श्रद्धालु मुख्य द्वार और परिक्रमा पथ की भव्यता निहारने के साथ ही परिजनों के साथ सेल्फी भी ले रहे हैं। नवरात्र मेले में उमड़ रही भीड़ के बीच रोशनी से जगमगाता कॉरिडोर आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

महाकाली के दरबार में उमड़े श्रद्धालु
भव्य श्रृंगार के दर्शन कर भक्त हुए भावविभोर, पहाड़ पर बंदरों को खिलाया चना-गुड़
विंध्याचल। शारदीय नवरात्र की चतुर्थी पर कालीखोह पहाड़ पर विराजमान मां महाकाली के दरबार में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। मां का विभिन्न प्रकार के फूलों से भव्य शृंगार किया गया। दर्शन-पूजन कर भक्त भावविभोर हो उठे। सुबह से देर रात तक मंदिर में दर्शनार्थियों का तांता लगा रहा। श्रद्धालुओं ने मां के दर्शन के बाद मंदिर परिसर में रक्षा बांधकर मनौती मांगी। इसके बाद पहाड़ पर बंदरों को चना-गुड़ खिलाया। मां के जयकारों से मंदिर परिसर दिनभर गूंजता रहा।

मां अष्टभुजा के दर्शन को उमड़े श्रद्धालु
रोपवे और सीढ़ियों से पहाड़ पर पहुंचे भक्त, मंदिर के नीचे लगी लंबी कतार
विंध्याचल। शारदीय नवरात्र की चतुर्थी पर अष्टभुजा पहाड़ स्थित मां अष्टभुजा देवी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। मां के भव्य स्वरूप का दर्शन कर भक्त निहाल हो उठे। कोई रोपवे से तो कोई सीढ़ियां चढ़कर देवी धाम पहुंचा। मंदिर के नीचे श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी रही। हाथों में नारियल, चुनरी, फूल-माला और प्रसाद लिए भक्त जयकारे लगाते हुए दर्शन के लिए आगे बढ़ते रहे। नवरात्र में अष्टभुजा पहाड़ की छटा और मंदिर परिसर का माहौल भक्तिमय बना हुआ है।

पत्थरों से घरौंदे बनाकर घर पाने की मनौती मांगते श्रद्धालु
विंध्याचल। शारदीय नवरात्र में विंध्य त्रिकोण परिक्रमा पथ पर पत्थरों से घरौंदे बनाने की परंपरा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। कालीखोह से अष्टभुजा मंदिर तक सड़क के किनारे रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु पत्थरों को सजाकर अपने सपनों के घर का प्रतिरूप बनाते हैं।
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लोकमान्यता है कि अष्टभुजा पहाड़ पर घरौंदा बनाकर मां से प्रार्थना करने पर अपना घर बनाने की मनोकामना पूरी होती है। उन्नाव से दर्शन-पूजन के लिए आए शशि दुबे ने परिवार के साथ घरौंदा बनाया। गोरखपुर की नगीना देवी और भभुआ के रामप्रकाश व सजनी देवी ने भी पत्थरों से घरौंदे बनाकर मनौती मांगी। हालांकि, इस परंपरा का शास्त्रीय ग्रंथों में उल्लेख नहीं मिलता, लेकिन लोक आस्था के कारण यह परंपरा वर्षों से श्रद्धालुओं के बीच प्रचलित है।
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