नगर के वासलीगंज में बिजली के पोल पर तारों के जाल से हादसों का खतरा बना है
मंडल मुख्यालय के रूप में जाने जाने वाले जिले में बिजली व्यवस्था भगवान भरोसे है। व्यवस्था के प्रति की जा रही लापरवाही लोगों की जान के साथ खिलवाड़ करने को काफी है। पोलों पर लगे लटकते तारों के जंजाल हादसों का सबब बन रहे हैं। विभागीय लापरवाही कभी भी इन पर भारी पड़ेगी।
मिर्जापुर के विद्युत विभाग की तस्वीर बदलने की कवायद यूं तो वर्षों पुरानी है लेकिन इसमें कुछ सुधार हाल के वर्षों में देखने को नहीं मिला है। नगर के मुख्य बाजारों में बिजली खंभों पर लटकते तार साक्षात मौत की तरह हैं। यह खंभे कब मौत का सबब बन जाए कहा नहीं जा सकता।
नगर के मुख्य बाजार वासलीगंज, घंटाघर त्रिमोहानी, लालडिग्गी, संगमोहाल, रमईपट्टी, अस्पताल तिराहा, इमामबाड़ा, गणेशगंज, मुकेरी बाजार, बाजीराव कटरा आदि इलाकों में खंभों पर तारों का फैला मकड़जाल बिजली विभाग की लापरवाही का आइना दिखा रहा है।
बड़े से बड़ा इंजीनियर भी पहली नजर में देख कर नहीं पकड़ सकता है कि कौन से तार से कौन सी गली रोशन हो रही है। कई इलाकों में तार आपस में इस कदर चिपक गए है ंकि इन्हें अलग करने के लिए तारों के बीच में बांस के फराटे लगाए गए हैं। नगर के कई इलाके ऐसे भी हैं जहां तारों का जाल सा बिछा है लेकिन यदि भगवान न करे यहां आग लगती है तो वहां फायर बिग्रेड भी नही पहुुंच सकता है। विभाग की लापरवाही से लोगों में नाराजगी है।
पिछले वर्ष जर्जर तारों को बदलने के लिए और बंच केबिल बिछाने के लिए बिजली विभाग को 48 करोड़ रुपये मिले थे लेकिन नगर का अधिकांश इलाका अभी भी जर्जर तारों के सहारे ही रोशन हो रहा है। बंच तार भी उन्हीं इलाकों में लगाए गए जहां बिजली चोरी अधिक थी।