अधिकारी बोले
बुधवार को आई आंधी से काफी नुकसान हुआ था। पहले नगर की आपूर्ति ठीक की गई। उसके बाद ग्रामीण क्षेत्रों की। उस युवक को भी थोड़ा धैर्य रखना चाहिए था। आपूर्ति बहाल करने के लिए विद्युत निगम युद्धस्तर पर काम कर रहा है। -आरके यादव, अधिशासी अभियंता, विद्युत निगम
रात को प्रदीप ने दी जान, चार दिन बाद सुबह आई लाइट
देहात कोतवाली क्षेत्र के पिपराडाड़ गांव में बिजली न होने के कारण गर्मी से परेशान प्रदीप ने फंदे से लटककर जान दे दी। अगले दिन रविवार की सुबह बिजली आपूर्ति भी बहाल हो गई। 13 मई की शाम को तेज आंधी-बारिश से पूरे जिले की बिजली व्यवस्था ध्वस्त हो गई थी। शहर में तो बिजली चालू होने में 24 घंटे से अधिक का समय लग गया पर ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली नहीं बन सकी थी। गांव में भी कई खंभे गिर गए थे। बिजली निगम के कर्मचारी पोल की मरम्मत कराने में जुटे थे। पर तीन दिनों तक कई गांव में बिजली नहीं आ सकी थी। देहात कोतवाली के पिपराडाड़ गांव में भी बिजली नहीं आई थी। घर पर अकेले रह रहा प्रदीप बिजली न होने से गर्मी से परेशान हो गया था। शनिवार रात को वह फंदे से लटका तो रविवार को बिजली भी आ गई।
पुलिस बोली
परिजन बिजली न होने के चलते फंदे पर लटककर जान देने की शिकायत करते हैं तो उसकी जांच की जाएगी। बाकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
अमित मिश्रा, देहात कोतवाल
गांव के लोगों ने प्रधान के जरिये बिजली निगम से की थी शिकायत
गांव के अतुल, नितेश, विकास, संदीप ने बताया कि बिजली न होने पर प्रधान के जरीये बिजली निगम से शिकायत की। बताया था कि गांव में बिजली नहीं होने से लोग परेशान हैं। बिजली निगम के कर्मचारी मरम्मत करने की बात कह रहे थे। बिजली बनाने में चार दिन लगा दिए। प्रदीप के भाई दीपक ने बताया कि गांव में भाई परिवार के साथ रहते थे। वह दूसरे गांव अर्जुनपुर में रहता है। भाई को किसी प्रकार की मानसिक समस्या नहीं थी। गांव वालों से वह बिजली न होने से गर्मी के कारण परेशान होने की बात कह रहे थे।