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Mirzapur News: हरसिंगपुर में फसलों को डुबोते हुए गांव की ओर बढ़ रहा पानी

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मिर्जापुर। गंगा के जलस्तर में वृद्धि का सिलसिला बृहस्पतिवार को भी जारी रहा। सुबह आठ बजे प्रति घंटे चार सेमी की रफ्तार से जलस्तर में वृद्धि हो रही थी। हालांकि दोपहर बाद जलस्तर में वृद्धि की गति धीमी हो गई। शाम चार बजे तक गंगा के जलस्तर में 0.25 सेमी की रफ्तार से वृद्धि हो रही थी। गंगा का पानी कोन ब्लाॅक के हरसिंहपुर व मल्लेपुर में खेतों में फसलों को डुबोते हुए गांवों की ओर पानी बढ़ रहा है। कई जगह मार्ग पर पानी भर गया है। इससे आवागमन बंद हो गया है।
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जिले में चेतावनी बिंदु 76.724 मीटर तथा खतरे का निशान 77.724 मीटर है। बृहस्पतिवार को सुबह आठ बजे गंगा का जलस्तर 74.920 मीटर रिकाॅर्ड किया गया। सुबह जलस्तर में चार सेमी की रफ्तार से वृद्धि हो रही थी, हालांकि दोपहर बाद रफ्तार धीमी हो गई। दोपहर करीब 12 बजे जलस्तर में 1.75 सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से वृद्धि हो रही थी। शाम चार बजे तक 0.25 सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से वृद्धि हो रही थी। बृहस्पतिवार को दोपहर में गंगा का जलस्तर 74.99 दर्ज किया गया। उधर, जलस्तर में वृद्धि गंगा के तटवर्ती इलाकों में बसे लोगों की चिंता बढ़ गई है। तटवर्ती गांवों में लोग अपने मवेशियों और उनके लिए चारे आदि की व्यवस्था करने में जुटे हुए हैं। जिले में अभी तक गंगा में सबसे ज्यादा जलस्तर नौ सितंबर 1978 को 80.34 मीटर रिकाॅर्ड किया गया था। इस बीच जलस्तर में वृद्धि को देखते हुए प्रशासन भी सतर्क है। जिला प्रशासन की तरफ से सदर और चुनार तहसील क्षेत्र में गंगा के तटवर्ती गांवों में कुल 37 बाढ़ चौकियां स्थापित कर अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती की गई है। चील्ह, कोन ब्लाॅक क्षेत्र के हरसिंगपुर में खेतों को डुबोते हुए बाढ़ का पानी गांवों की ओर बढ़ रहा है।
उधर, गंगा के जलस्तर में वृद्धि के कारण छानबे क्षेत्र में कर्णावती नदी में उफान आ गया। इससे अरगीसरपती, बरुआ रपटा, महुआरी संपर्क मार्ग के अलावा भटेवरा, डेरवा व विजयपुर मार्ग पर भी पानी भर जाने से आवागमन बंद हो गया है। उधर, अकोढ़ी-बबुरा मार्ग पर रेलवे पुल के नीचे पानी पहुंच जाने से लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही है। हरगढ़, गोगांव, मिश्रपुर, दुगौली, भिलगौर, कोठरामिश्रान, चड़ैचा, झिलवर, नीबीगहरवार, अर्जुनपुर, आदमपुर, नौगांव, ऊंचडीह व बबुरा आदि गांवों में कटान की समस्या पैदा हो गई है। तटवर्ती इलाकों में बसे लोग सुरक्षित स्थान की तलाश में जुट गए हैं। पशुपालकों ने भी अपने मवेशियों को ऊंचे स्थानों पर ले जाने की तैयारी शुरू कर दी है।
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