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चेतावनी बिंदु पार, खतरे निशान के करीब पहुंची गंगा

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मिर्जापुर। गंगा का उफान थमने का नाम नहीं ले रहा है। चेतावनी बिंदु 76.724 मीटर पार कर गंगा का जलस्तर शुक्रवार की शाम 77.09 मीटर पहुंच गया, जो खतरे के निशान से मात्र 0.634 मीटर दूर है। खतरे का निशान 77.724 मीटर है।
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शुक्रवार की शाम चार बजे तीन सेमी. प्रति घंटे की रफ्तार से गंगा का बढ़ाव जारी रहा। जलस्तर बढ़ने से गंगा से जुड़ी सहायक नदियों और नालों में उफान आ गया है। तटवर्ती इलाकों में एक के बाद एक खेत में बोई फसलों को डूबोते हुए पानी तेजी से गांवों की ओर पहुंच रहा है। सदर व चुनार तहसील क्षेत्र के तटवर्ती अधिकांश गांव व घर धीरे-धीरे पानी से घिरते जा रहे हैं। कई स्थानों पर लोगों के लिए नाव ही सहारा बना हुआ है। जिगना, बाढ़ को देखते हुए तट पर बसे लोग अपने-अपने मवेशियों को रिश्तेदारी व सुरक्षित स्थानों की ओर जाना शुरू कर दिया है। अकोढ़ी, बबुरा, जोपा व श्रीनिवासधाम बाढ़ चौकी पर अधिकारी, कर्मचारी नजर गड़ाए हुए हैं। बाढ़ का पानी चेहरा, बजटा, काशीसरपत्ती, देवरी, मुतलिके गौरा, गोगांव, खैरा, मिश्रपुर, अकोढ़ी, बबुरा, बिरोही, देवरी, अरंगीसरपत्ती, भटेवरा, कठवइया, बलापुर, कोठरा मिश्रान व डंगहर गौरा सहित कई गांव में फसलों को चपेट में लिया है। बिरोही, महडौरा, कोठरा मिश्रान, देवरी आदि गांव में नीचे बसे लोगों के घरों में पानी पहुंच गया है। कर्णावती नदी में पानी बढ़ने से भटेवरा- विजयपुर मार्ग, अरगीसरपत्ती, महुआरी खुर्द, बरुआ मार्ग बंद हो गया है। चील्ह, विकासखंड कोन में गंगा कहर शुरू हो गया है। गांव में बाढ़ का पानी पहुंचने से किसानों की फसलें पानी में डूब गईं। हरसिंहपुर, मल्लेपुर, तिलठी, मिश्रधाप, अनिरुद्धपुर पुरब पट्टी, अनिरुद्ध पुर पश्चिम पट्टी में खेत तक पहुंचे गंगा से खेतों में बोई फसलें जलमग्न हो गईं हैं। नेनुआ, मिर्चा, बैगन, कोहड़ा, कद्दू, लौकी सहित अन्य फसलें पानी में डूबकर बर्बाद हो गई।
कछवां, मझवां विकास खंड के निचले हिस्सों में पहुंचे बाढ़ का पानी खेतों में घुस गया है। सैकड़ों बीघा सब्जी और धान की फसल जलमग्न हो गईं। बाढ़ से बचाव के पर्याप्त इंतजाम न होने पर लोगों आक्रोश व्याप्त है। चुनार, गंगा में बढ़ते जल स्तर से टम्मलगंज, बहरामगंज का संपर्क टूट गया है। बाढ़ का पानी लोगों के घरों में घुसने लगा है। बृहस्पतिवार की रात नगर पालिका क्षेत्र से सटे रैपुरिया व जलालपुर माफी गांव का भी संपर्क नगर से टूट गया। गंगा का पानी रैपुरिया व जलालपुर माफी गांव के पुलिया पर आ जाने से आवागमन बाधित हो गया। इलाके के लोग लंबी दूरी तय कर जरगो नदी पर बने पुलिया को पार कर सरैया, भरेहठा होते हुए अपने गंतव्य स्थान को पहुंच रहे हैं। पशुपालक मवेशियों को लेकर सुरक्षित व उंचे स्थान की ओर जा रहे हैं। सीखड़, धननुपुर सहित गंगा के तटवर्ती गांवों में बाढ़ का पानी पहुंचना शुरु हो गया है। अधिकांश किसानों के खेतों में बोई अरहर, ज्वार, बाजरा, मक्का, उरद, मूंग सहित सब्जियों की खेत पानी में डूब गई है। फुलहा, रामगढ़, प्रेमापुर, रामगढ़, सीखड़, गोरैया, लालपुर, भुवालपुर, कठेरवा, मवैया, मिशिरपूरा, मेडिया, बेदौली, बसारतपुर आदि गांव में बाढ़ का खतरा अब पूरी तरह से बढ़ गया है। कैलहट, ढाब में गंगा के उफान के चलते किसानों की हजारों एकड़ फसल बर्वाद हो गई हैं। गांगपुर, भवानीपुर, धरम्मरपुर, गोविंदपुर, बगही, रामरायपुर, चंदापुर, जलालपुर माफी, केशवपुर सहित बाढ़ के चलते ढाब के कैलहट, नकहरा, पचेवरा, बेला में फसल का नुकसान हुआ। बगही, जलालपुर माफी में आवागमन के लिए प्रशासन की ओर से नौका का संचालन किया जा रहा हैं।
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