कंतित शरीफ के दर पर सोमवार को जियारत करने के लिए जायरीनों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। हजरत ख्वाजा सैय्यद इस्माइल चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह के सालाना उर्स के दूसरे दिन जायरीनाें ने चादर पेश कर दुआएं मांगी।
बाबा के दरबार में हर एक का दर्द लफ्ज बन कर आंसुआें के साथ निकल रहे थे। चिलचिलाते धूप की परवाह किए बगैर लोग अपनी हाजिरी लगाते रहे।
हम फकीराें से दोस्ती कर लो बादशाहों के गुण सिखा देंगे...हजरत ख्वाजा सैय्यद इस्माइल चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह का पैगाम मुहब्बत का पैगाम था।
यकीनन तौर पर कंतित शरीफ का यही पैगाम था। कंतित शरीफ के सालाना उर्स के दूसरे दिन देश के कोने-कोने से आए जायरीनों ने बाबा के मजार पर चादरपोशी कर दुआएं मांगी।
मन्नतें और मुरादें पूरी होने पर बाबा के दर पर पहुंचे जायरीन अकीदत के साथ मत्था टेका। हजरत की दरगाह पर सोमवार की भोर से देर रात तक चादर चढ़ाने और मन्नतें मांगने वालों का तांता लगा रहा।
पूर्वांचल सहित कई प्रांताें से शिरकत किए जायरीनों ने मजार पर चादरपोशी कर दुआएं मांगी। तल्ख धूप की परवाह किए बगैर बाबा के दरबार में जियारत करने वालोें का हुजूम उमड़ पड़ा।
दोपहर बाद से लेकर देर शाम तक मेला क्षेत्र का नजारा देखते ही बन रहा था। रविवार की रात जगमग रोशनी में नहाया हुआ मेला क्षेत्र अद्भुत छटा बिखेर रहा था। विभिन्न अंजुमनाें, स्वयं सेवी संस्थाआें एवं मानिंद लोगाें की तरफ से शीतल पेयजल और शरबत पिलाने के लिए स्टाल भी लगाए गए थे।
मेले में लगे तरह-तरह के झूलों पर झूल कर जहां एक ओर बच्चों ने मेले का लुत्फ उठाया वहीं तमाम जायरीनों ने मेले में लगी तरह-तरह की दुकानों से अपने-अपने जरूरत की वस्तुआें की जमकर खरीददारी भी किया।