माघ कृष्ण पक्ष पंचमी पर पावन विंध्य दरबार में दर्शन-पूजन करने के लिए श्रद्धालुओं का रेला लगा रहा।
शुक्रवार की भोर में मंगला आरती के बाद से ही मंदिर में भक्तों के आने का सिलसिला शुरू हो गया था जो देर रात तक अनवरत चलता रहा। घंटा-घड़ियाल, शंख और माता के जयकारे से पूरा मंदिर परिसर गूंज रहा था।
जगत जननी के भव्य स्वरूप का फूलों से किया गया भव्य श्रृंगार दर्शन कर श्रद्धालु निहाल हो उठे। मंदिर के छत पर जहां एक ओर मुंडन संस्कार होता रहा, वहीं दूसरी ओर वैदिक मंत्रोच्चार बीच साधक साधना करने में तल्लीन दिखे।
विंध्याचल मंदिर में दर्शन-पूजन करने के बाद बड़ी संख्या में भक्तों ने पहाड़ पर विराजामान महाकाली और मां अष्टभुजी देवी के भव्य स्वरूप का दर्शन कर सुख-समृद्धि के लिए कामना किया।
दर्शन-पूजन करने के बाद दर्शनार्थियों ने विंध्य गलियाें में भ्रमण कर अपने-अपने जरूरत की वस्तुओं की खरीदारी की।