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जयकारे से गूंजा विंध्य दरबार.

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विंध्याचल। शारदीय नवरात्र शुरू होते ही रविवार की मध्य रात्रि को पहाड़ावाली के जय जयकारे से विंध्य धाम की गलियां गूंज उठीं। तरह-तरह के सुंगधित फूलों से जगत जननी का दरबार सजा रहा। पहले दिन शृंगार के बाद मां विंध्यवासिनी के भव्य स्वरूप का दर्शन कर श्रद्धालु निहाल हो उठे। सूर्यास्त के बाद से ही मेला क्षेत्र श्रद्धालुओं से पट गया था। दर्शन-पूजन के दौरान श्रद्धालुओं को परेशानी न हो। इसके लिए जिले के आला अधिकारी मेला क्षेत्र में अपने-अपने स्थान पर डट गए।
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मेला की पूर्व संध्या पर विंध्याचल की अद्भुत छटा देखते ही बन रही थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विंध्याचल आने के बाद जिला प्रशासन भी पूरी सक्रियता से अपनी भूमिका में दिखा। मेला क्षेत्र की मुख्य सड़कों, गलियों, गंगा घाटों और अष्टभुजा पहाड़ पर देश के कोने-कोने से आने वाले भक्तों को किसी भी प्रकार की असुविधा ना होने पाए, इसके लिए प्रशासन की ओर से विशेष सतर्कता बरती जा रही है। विंध्यधाम की प्रमुख गलियों में माला फूल, नारियल, चुनरी व प्रसाद की दुकानें सजी रहीं। आधी रात के बाद मंदिर के बाहर भक्तों की लंबी कतारें लगीं रहीं। मंगला आरती के बाद मंदिर का कपाट खुलते ही भक्त माता के जयकारे के साथ मंदिर की तरफ बढ़े चले जा रहे थे। किसी ने गर्भगृह तो किसी ने झांकी से माता के भव्य स्वरुप का दर्शन- पूजन कर सुख- समृद्धि की कामना की।
कॉरिडोर के कार्य श्रद्धालुओं को कर रहे आकर्षित
विंध्याचल। विंध्य कॉरिडोर के तहत हुए प्रमुख कार्य श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित करेंगे। मंदिर तक पहुंचने वाले चौड़ीकरण मार्गों में पुरानी वीआईपी, न्यू वीआईपी मार्ग पर लाल पत्थरों का अलग आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इसके अलावा गंगा घाटों पर एनडीआरएफ पुलिस, पीएससी, स्थानीय गोताखोरों की तैनाती की गई है। जिला आपूर्ति विभाग की ओर से श्रद्धालुओं के लिए सस्ते दर पर पूरी सब्जी का स्टाल लगाया गया है। रेलवे स्टेशन एवं रैन बसेरा मेला क्षेत्र सीसीटीवी निगरानी एवं ध्वनि प्रदूषण यंत्र द्वारा खोया-पाया केंद्र,त्रिकोण परिक्रमा पथ पर वृद्धजनों के लिए रोपवे की सुविधा, गंगा घाटों पर भव्य गंगा आरती, मां विंध्यवासिनी मंदिर के पास एवं गंगा घाटों पर मुंडन संस्कार के लिए स्थान निर्धारित किए गए हैं।
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हाथी पर होगा मां का आगमन
विंध्याचल। शारदीय नवरात्र 26 सितंबर को शुक्ल और ब्रह्म के दुर्लभ योग के साथ शुरू हो रहा है। साथ ही नवरात्र का प्रारंभ सोमवार से हो रहा है, जिससे भगवती का आगमन हाथी से होगा जो अच्छी वर्षा व अन्न के पैदावार में वृद्धि का सूचक है। आध्यात्मिक धर्मगुरु त्रियोगी मिश्र ने बताया कि माता के आगमन का वाहन हाथी ज्ञान व समृद्धि का प्रतीक है। इससे देश में आर्थिक समृद्धि आएगी। इस नवरात्र में लोग अपनी आध्यात्मिक और मानसिक शक्ति के संचय के लिए अनेक प्रकार के व्रत, संयम, नियम, यज्ञ, भजन, पूजन, योग-साधना आदि करते हैं। क्योंकि आदिकाल से ही देवताओं की समुच्च शक्ति आदिशक्ति मां विंध्य वासिनी ही आसुरी शक्तियों से देवत्व की रक्षा करती रही है। इसी दैवीय शक्ति के नव स्वरूपों के असीम ऊर्जा को प्राप्त करने का नवरात्र पावन पर्व है।
साधक करेंगे कलश स्थापना, पूजी जाएंगी मां अंबे
मिर्जापुर। शारदीय नवरात्र में घर-घर कलश स्थापित कर नौ दिनों तक मां अंबे की पूजा अर्चना की जाएगी। पूर्व संध्या पर लोग अपने-अपने घरों की साफ-सफाई में जुटे रहे।
बाजार में कलश, दियली के साथ ही पूजन सामग्रियों की दुकानों पर ग्राहको की भीड़ दिखी। फल और फूल की दुकानों पर लोग खरीदारी में जुटे रहे। झंडा, चुनरी के साथ ही माता के शृंगार सामग्रियों की खरीदारी हुई। नवरात्र को देखते हुए दूध और दही के लिए लोग दुकानों पर आर्डर बुक कराते दिखे।
शारदीय नवरात्र में कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 26 सितंबर को प्रात: 6 बजकर 02 मिनट से प्रात: 7 बजकर 38 मिनट तक रहेगा। इसके बाद का मुहूर्त अभिजित मुहूर्त होगा जो प्रात:11:बजकर 36 मिनट से अपराह्न 12 बजकर 24 मिनट तक रहेगा। नवरात्र यानी नौ विशेष रात्रियां हैं। इस समय शक्ति के नौ रूपों की उपासना का श्रेष्ठ काल माना जाता है। रात्रि शब्द सिद्धि का प्रतीक है। सिद्धि और साधना की दृष्टि से शारदीय नवरात्र को अधिक महत्वपूर्ण माना गया है।
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-त्रियोगी नारायण उर्फ मिठ्ठू मिश्र, आध्यात्मिक धर्म गुरु।
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