महाअष्टमी पर त्रिपुर सुंदरी मां महालक्ष्मी स्वरूपा जगदंबा मां विंध्यवासिनी के भव्य स्वरूप का दर्शन-पूजन करने को देवी धाम में आस्था का समंदर उमड़ पड़ा। क्या छोटे और क्या बड़े सभी देवी मां की एक झलक पाने को लालायित दिखाई दिए। गुड़हल, गुलाब व कमल पुष्पों व रत्नजड़ित आभूषणों से मां विंध्यवासिनी देवी का किया गया भव्य श्रृंगार का दर्शन कर श्रद्धालु निहाल हो उठे।
चैत्र नवरात्र की महाअष्टमी पर मध्य रात्रि के बाद से ही भोर में मंगला आरती के पूर्व तक तथा मंगला आरती के बाद से अनवरत दर्शन-पूजन का क्रम चलता रहा। देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालुओं से विंध्य की सभी गलियां पटी रहीं, वहीं गंगा घाटाें पर स्नान-ध्यान करने के लिए स्नानार्थियों का तांता लगा रहा। न्यू वीआईपी रोड व पुरानी वीआईपी रोड सहित कोतवाली गली, बच्चा पाठक गली, जैपुरिया गली, पक्काघाट गली सहित कई अन्य गलियों में कतार में खड़े भक्त मां का जयघोष करते मंदिर की तरफ बढ़े जा रहे थे। कतार में खड़े बड़ाें के साथ ही बच्चे भी अपने माथे पर जय मां विंध्यवासिनी लिखी पट्टी को बांधे मां का जयकारा लगाते रहे। मंदिर में झांकी से एवं गर्भगृह से मां विंध्यवासिनी के भव्य स्वरूप का दर्शन-पूजन कर सुख-समृद्धि की कामना की।
मां का दर्शन-पूजन करने के बाद भक्ताें ने देवीधाम परिसर में विराजमान मां काली, मां दुर्गा, मां सरस्वती, मां शीतला, मां लक्ष्मी सहित श्री पंचमुखी महादेव, राधा-कृष्ण, दक्षिणमुखी हनुमान, बटूक भैरव जी के मंदिराें में जाकर बड़े ही श्रद्धाभाव से दर्शन-पूजन किया। शहनाई व नगाड़े की धुन पर मंदिर के छत पर मुंडन संस्कार होते रहे, वहीं जगह-जगह आसन पर बैठकर साधक मंत्रोच्चार बीच साधना करने में तल्लीन दिखे।
मां के दरबार में उमड़ी भक्ताें की भीड़ को नियंत्रित करने में पुलिस व पीएसी के जवान मुस्तैदी से डटे रहे, वहीं स्काउट-गाइड व श्री विंध्य पंडा समाज के पदाधिकारी व सदस्यगण आस्थावानों की सेवा में लगे रहे।