कछवां। क्षेत्र के बरैनी गांव में मुंबई से साइकिल चलाकर दो श्रमिक अपने घर पहुंचे। तो एक युवक पैदल ही दिल्ली से चलकर एक सप्ताह में अपने गांव कंचन सराय पहुंचा। ग्रामीणों की सुचना पर पुलिस उन्हें स्वास्थ्य केंद्र ले गई। जहां डाक्टर ने जांच कर उन्हें घर पर 14 दिन होम क्वारंटीन में रहने का कहा।
बरैनी गांव के केवटान बस्ती से मुंबई में मजदूरी करने गए दो श्रमिक लाकडाउन के बाद गांव जाने के लिए परेशान थे। पहुंचने का कोई आसरा न देख श्रमिकों ने अपने जमापूंजी से नई साइकिल खरीदी और अपने गांव की ओर चल पड़े। 10 दिन की कड़ी मेहनत के बाद लगातार साइकिल चलाते हुए बरैनी अपने गांव पहुंचे। ग्रामीणों की सूचना पर दोनों मजदूरों को पुलिस थाने लाई। इसके बाद स्वास्थ्य केंद्र ले गई। वहां पर उनका थर्मल स्कैनर से जांच किया गया। जांच में स्वस्थ मिले पर डाक्टर ने उन्हें घर में क्वारंटीन रहने का निर्देश दिया। कनकसराय गांव से दर्जनों श्रमिक दिल्ली मजदूरी करने गए थे। लाकडाउन के बाद काम बंद होने से श्रमिकों के सामने रोटी रोजी की समस्या आ गई। इसके बाद कनकसराय निवासी युवक पैदल अपने गांव पहुंचा। हैरानी की बात ये है कि डेढ़ से दो हजार किलोमीटर की यात्रा पर निकले इन मजदूरों के पास खाने-पीने का कोई सामान नहीं था। थानाध्यक्ष मनोज सिंह ने बताया कि स्वास्थ्य केेंद्र पर जांच के बाद उन्हें घर छोड़ दिया गया।
बाहर से आए 62 श्रमिकों की कराई जांच
नरायनपुर। वाराणसी-मिर्जापुर मार्ग पर शनिवार को देर रात पैदल बार्डर पार कर रहे 62 मजदूरों को रोककर अस्थाई क्वारंटीन सेंटर में रात में विश्राम के बाद रविवार को स्वास्थ्य टीम द्वारा जांच कराया गया। जांच के बाद सभी को 14 दिन होम क्वारंटीन में रहने की हिदायत देकर छोड़ दिया गया। चौकी प्रभारी नरायनपुर श्यामधर सिंह ने बताया कि राजस्थान प्रदेश में बांगड़ सीमेंट फैक्ट्री के कार्यरत मजदूरो को बस द्वारा राजस्थान से लाकर टेंगरा मोड़ पर छोड़ दिया। इसमे अहरौरा, अदलहाट, चुनार, व चन्दौली जनपद क्षेत्र के मजदूर बस से उतरने के बाद पैदल ही घर को चल दिए। वाराणसी-मिर्जापुर मार्ग पर बार्डर पर तैनात नरायनपुर पुलिस ने मजदूरो को रोककर नरायनपुर स्थित सनबीम स्कूल परिसर के अस्थाई क्वारंटीन सेंटर में रखवा दिया। रविवार को चुनार से आई स्वास्थ्य विभाग की टीम स्वास्थ्य जांच करने के बाद 14 दिन का होम क्वारंटीन रहने की हिदायत देकर छोड़ दिया।