मिर्जापुर में पद्म विभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्र को श्रद्धांजलि दी गई। बूढ़ेनाथ मंदिर के महंत डॉक्टर योगानंद गिरी ने कहा कि पंडित जी ने तीन वर्ष की उम्र में अपने पिता के साथ संगीत सीखने की शुरुआत की थी।
मिर्जापुर नगर के बूढ़ेनाथ स्थित बूढ़ेनाथ मंदिर में शनिवार को एक प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया, जिसमें दिवंगत पद्म विभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्र का स्मरण कर उनको श्रद्धांजलि दी गई।
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बूढ़ेनाथ मंदिर के महंत डॉक्टर योगानंद गिरी ने कहा कि पंडित जी ने तीन वर्ष की उम्र में अपने पिता के साथ संगीत सीखने की शुरुआत की थी। उसके बाद वह 9 वर्ष की उम्र में वाराणसी आए और किराना घराने के उस्ताद अब्दुल गनी खान से शिक्षा प्राप्त की। कहा कि उन्होंने हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में एक स्थान बनाया।
पद्मश्री और कजरी गायिका उर्मिला श्रीवास्तव ने कहा कि पंडित जी किराना और बनारस घराने के गायक थे उन्होंने अपनी कर्मभूमि बनारस को बनाई और अपने कार्य से प्रसिद्ध हुए। उनके निधन पर आज मिर्जापुर अपने आप को दुखी महसूस कर रहा है।
उषा गुप्ता ने कहा कि पंडित जी पूर्वी ठुमरी, दादरा,चैती और कजरी के लिए जाने जाते हैं। उनके गायन में अलग विशेषता थी। होली आदि की जो प्रस्तुति उन्होंने की वह दुर्लभ है। वह अपनी गायिकी से देवीय वातावरण का सृजन कर देते थे। अपने जीवन के अंतिम दिनों में उन्होने मिर्जापुर में निवास किया। उनके जाने से सभी मर्माहत है। इस अवसर पर उपस्थित अन्य लोगों ने भी पंडित जी की स्मृति में अपने विचार प्रकट किया अंत में 2 मिनट का मौन रखकर उनको श्रद्धांजलि दी गई।