कलेक्ट्रेट सभागार में शुक्रवार को जिला पोषण समिति की बैठक हुई। इसमें मध्यम अति कुपोषित व तीव्र अति कुपोषित बच्चों की संख्या, कुपोषण की स्थिति व पोषण से संबंधित बिंदुओं पर समीक्षा की गई।
बैठक में जिलाधिकारी दिव्या मित्तल ने आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण में हुई प्रगति की जानकारी ली। साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिया कि जो भवन पूर्ण हो गए हैं, उनको तत्काल हस्तांतरित कराएं। जिला कार्यक्रम अधिकारी एवं बाल विकास परियोजना अधिकारियों ने बैठक में बताया कि 2697 आंगनबाड़ी केंद्रों में सरकार की तरफ से संचालित योजनाओं के अनुरूप टीकाकरण कराया जा रहा है।
मध्यम अति कुपोषित व तीव्र अति कुपोषित बच्चों के संबंध में अधिकारियों ने बताया कि बीते जून माह के कुल तीव्र अति कुपोषित बच्चों की संख्या 7830 की तुलना में जुलाई से सितंबर तक 3422 बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार हुआ हैं। इसी प्रकार जुलाई से सितंबर तक 1983 नये तीव्र अति कुपोषित बच्चों को चिह्नित किया गया है। वर्तमान में कुल 6391 तीव्र अति कुपोषित बच्चे हैं।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि 2668 आंगनबाड़ी केंद्रों में शून्य से पांच वर्ष तक के 281314 बच्चे पंजीकृत हैं। इनमें से 274254 बच्चों की लंबाई, ऊंचाई तथा वजन किया गया है। इसके तहत उम्र की तुलना में 35652 मध्यम अल्प वजन, 20859 गंभीर अल्प वजन, 15518 मध्यम तीव्र कुपोषित तथा 6391 तीव्र कुपोषित बच्चे जिले में हैं।
बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने सीरप व टैबलेट की ब्लॉकवार उपलब्धता, अनुपूरक पुष्टाहार वितरण तथा आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण की प्रगति की जानकारी ली। अधिकारियों ने उन्हें बताया कि कुल 18 निर्माणाधीन आंगनबाड़ी केंद्रों में से 15 का निर्माण लगभग पूरा कर लिया गया है। जिलाधिकारी ने सभी सुपरवाइजरों को निर्देश दिया कि जहां बच्चों का वजन व अन्य योजनाओं में प्रगति कम है, वहां केंद्रों की मानिटरिंग कर पोषण ट्रैकर एप, वजन फीडिंग, आधार फीडिंग सुनिश्चित कराएं।
बैठक में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. राजेंद्र प्रसाद, जिला कार्यक्रम अधिकारी वाणी वर्मा, जिला पंचायत राज अधिकारी अरविंद कुमार सहित अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।