प्रकृति के खूबसूरत नजारों पर जिले में ग्रहण लगता जा रहा है। ईश्वर की शानदार कृतियों को मानव नष्ट करने पर लगा हुआ है। यह हम नहीं कह रहे बल्कि जंगल और पहाड़ की जुबानी है।
जिले में वैसे तो विंढम फाल, टांडा फाल, लखनिया दरी और सिद्धनाथ की दरी जैसे प्रसद्धि पर्यटक स्थल आबाद हैं लेकिन इन पर्यटन स्थलों पर सुविधाएं न के बराबर हैं जो हैं भी देखरेख के अभाव में चौपट हो गई हैं।
आदि शिल्पी ने जिले को खूबसूरत नजारों से संवारा है। जंगल पहाड़ों से आच्छादित जिले में नदियों और प्रपातों की शोभा भी देखते ही बनती है लेकिन यहां आने वाले पयर्टक ही इसे नुकसान पहुंचा रहे हैं।
विंढमफाल में शनिवार को इतनी गंदगी देखने को मिली कि वहां खाना बनाने वालों को भी तकलीफ झेलना पड़ा। सुरक्षा और संरक्षा का कोई प्रबंध नहीं होने के कारण नग्न स्नान भी यहां आम दिखा।
कोई भी स्थान ऐसा नहीं था जहां खाने के बाद न नष्ट होने वाले प्लास्टिक के थैले और प्लेट न फेंके गए हों। यहां कभी फाल के इस पार से उस पार जाने के लिए पुल हुआ करता था जो टूट कर कहां चला गया किसी को पता नहीं।
फाल के बाहर कभी छोटा चिड़ियाघर हुआ करता था जिसमें पशुओं को रखा गया था लेकिन पशुओं को रख रखाव के अभाव में कानपुर भेज दिया गया।
सिद्धनाथ की दरी और लखनिया दरी प्रपात पर भी गंदगी का आलम है। सुरक्षा का अभाव भी यहां पर्यटकों को चैन की सांस नहीं लेने देता है। कई बार इन स्थानों पर आपराधिक घटनाएं भी घटित हो चुकी हैं।
लखनिया दरी पर बीते वर्ष अपराधियों के दो गुटों में चली गोली में तीन अपराधियों की मौत हो गई थी। बावजूद इसके पर्यटक स्थलों पर सुरक्षा के व्यापक प्रबंध नहीं किए गए।