मिर्जापुर। शिक्षा के विकास में कार्यदायी संस्थाओं और विभागों की लापरवाही भारी पड़ रही है। जिले में बच्चों के लिए राजकीय आवासीय विद्यालयों के लिए तीन माडल स्कूलों के निर्माण की स्वीकृति दी गई थी। चयन के बाद वर्ष 2011 में काम शुरू हुआ लेकिन आज 11 साल बाद भी स्कूल के भवनों का निर्माण पूरा नहीं हो सका है। जिसके चलते आज तक स्कूलों में पढ़ाई शुरू नहीं हो पाई और बच्चे बेहतर शिक्षा से वंचित हैं। यह स्थिति उस समय है जबकि विभाग ने कार्यदायी संस्था को पूरा बजट के धन का भुगतान कर दिया है। राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए जिले में भोजपुर पहाड़ी, बैरमपुर राजगढ़ और महामलपुर कछवां में वर्ष 2009-10 में राजकीय मॉडल स्कूल के निर्माण का निर्णय लिया गया था। इसमें भोजपुर पहाड़ी का स्कूल तो बन गया और उसका संचालन भी शुरू हो गया लेकिन शेष दो विद्यालय अभी तक अधर में लटके पड़े हैं। स्कूल के निर्माण के लिए प्रति विद्यालय शासन द्वारा तीन करोड़ दो लाख रुपया का बजट आवंटित किया था। इन स्कूलों का निर्माण कार्य वर्ष 2011 में कार्यदायी संस्था सीएंडडीएस द्वारा आरंभ किया गया, जो आज 11 वर्ष बाद भी पूरा नहीं हो सका है। हांलाकि बैरमपुर राजगढ़ में काम धीमी गति से होने के कारण जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय द्वारा समय- समय पर सीएंडडीएस के अभियंताओं पर नाराजगी जतायी गई। इसके बाद भी दो राजगढ़ के बैरमपुर व कछवां के महामलपुर विद्यालय की फिनिशिंग नहीं हो पा रही है।