अहरौरा क्षेत्र के अमवादरी स्थित जंगल के पास शनिवार की दोपहर भारी मात्रा में सरकारी अस्पतालों में वितरण के लिए आई दवाएं दवाइयां बरामद की गईं। लगभग एक मिनी ट्रक दवाएं किसी लावारिस हाल में फेंक दी थीं। बरामद दवाओं की कीमत लाखों रुपये में आंकी गई है। उनमें से ज्यादातर एक्सपायर्ड हो चुकी हैं। उनको इस तरह फेंकने से जंगली जानवरों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। सूचना देने के बाद भी ड्रग इंसपेक्टर मौके पर नहीं पहुंचे और ना ही दवाओं को वहां से हटवाया गया।
अमवादरी जंगल के पास दोपहर में जानवरों को लेकर जा रहे चरवाहों को भारी मात्रा में दवाइया फेंकी दिखाई दीं। उन्होंने ने इसकी सूचना ग्रामीणों को दी। धीरे-धीरे यह खबर पूरे क्षेत्र में फैल गई। बड़ी संख्या में लोग वहां एकत्रित हो गए। अनुमान लगाया जा रहा है कि एक मिनी ट्रक दवाएं हैं, जिनकी कीमत लाखों रुपये आंकी गई है। सरकारी अस्पतालों में वितरण के लिए भेजी गई, ज्यादातर दवाओं की मियाद बीत चुकी है। इसके बावजूद उनको जंगल में फेंकने से जंगली जीवों को खतरा उत्पन्न हो गया है। ग्रामीणों ने इसकी सूचना ड्रग इंस्पेक्टर को दी लेकिन देर शाम तक स्वास्थ्य विभाग का कोई अफसर मौके पर नहीं पहंचा। न ही दवाएं हटवाई गईं। ग्रामीणों कहना है कि तमाम दवाओं खुली हैं और उनके खाने से जानवरों की सेहत बिगड़ सकती है। शिकायत करने पर बाद में मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने टीम भेजी लेकिन रात होने के कारण टीम दवाओं के एकत्रित कर ला नहीं सकी। सुबह दोबारा टीम मौके पर जाएगी। कयास लगाया जा रहा है कि दवाएं मिर्जापुर या बनारस के अस्पतालों से यहां लाकर फेंकी गई हैं। अभी कुछ महीने पहले ही मंडलीय अस्पताल के पीछे भी काफी मात्रा में दवाएं फेंकी मिली थीं।
मुख्य चिकित्साधिकारी डा. उमेश यादव ने कहा कि दवाइयों को इस तरह लावारिस हाल में फेंकना अपराध है। एक्स्पायर्ड दवाओं जला देना चाहिये या तो किसी निर्जन स्थान पर जमीन में गाड़ना चाहिए। दवा किसकी है किस फर्म की है और उसका बैच नंबर क्या है, इससे पता लगाया जा सकता है वे कहां वितरण के लिए आई थीं। पता कराया जा रहा है कि दवा कहां की है।