फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Mirzapur News: गंगा घाट पर ऑक्सीजन की कमी से हजारों मछलियां मरीं

विज्ञापन
क्षेत्र के तिलई मौआर गांव में गंगा के किनारे मरी मछलियां, संवाद
विज्ञापन
-बदबू से लोगों को स्नान में हो रही परेशानी, मरी मछलियों को देखने के लिए जुटी ग्रामीणों की भीड़
विज्ञापन

संवाद न्यूज एजेंसी

मिर्जापुर। गंगा की स्वच्छता और निर्मलता के लिए भले ही लगातार दावे किए जा रहे हों, लेकिन छानबे क्षेत्र के तिलई मौआर, उचडीह और बबुरा गांव स्थित गंगा घाटों पर ऑक्सीजन की कमी से हजारों मछलियां मर गईं। मंगलवार सुबह लोगों को घाट किनारे हजारों की संख्या में मछलियां पानी में तैरती मिलीं। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में मछलियों के मरने की घटना से इलाके में अफरा तफरी मच गई।
बीएचयू के मौसम वैज्ञानिक शिवमंगल सिंह ने बताया कि एक लीटर पानी के लिए पांच मिलीग्राम ऑक्सीजन होना चाहिए। सुबह स्नान और पूजा के लिए घाट पर पहुंचे ग्रामीणों ने जब गंगा किनारे मृत मछलियों को तैरते देखा तो दंग रह गए। देखते ही देखते लोगों की भारी भीड़ जुट गई। ग्रामीणों ने आशंका जताई कि पानी में प्रदूषण बढ़ने या किसी जहरीले तत्व के मिलने से मछलियों की मौत हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि गंगा में गिर रहे गंदे नालों और रासायनिक अपशिष्टों के कारण जल प्रदूषित हो रहा है। वहीं कुछ लोगों ने बताया कि इस बार गंगा नदी का जलस्तर काफी कम है और कई जगह नदी दो धाराओं में बंट गई है। पानी कम होने और लगातार बढ़ रहे तापमान के कारण छोटी मछलियां दम तोड़ रही हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

घाटों पर मरी मछलियों से उठ रही बदबू के कारण लोगों को स्नान करने में भी परेशानी हो रही है। स्थानीय लोगों ने मामले की जांच कराए जाने और गंगा जल की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की है।
-
वर्जन
गंगा में पानी कम होने की वजह से मछलियों की मौत हो रही है। इस पर सरकार को ध्यान देने की जरूरत है।
ताड़क नाथ सिंह, प्रधान, तिलई मौआर।
अराजक तत्व के पानी में जहरीला पदार्थ मिलाए जाने से भी यह स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
रिंकू सिंह, बबुरा।
गंगा में गिर रहे गंदे नालों और रासायनिक अपशिष्टों के कारण जल प्रदूषित हो रहा है। मछलियां मर रही हैं।
बिक्रम सिंह, बबुरा।
-
वर्जन
गर्मी अधिक होने से व्याकुल होकर मछलियां पानी के ऊपर आ रही है। ऑक्सीजन की कमी से कई जगह से मछलियों के मरने की शिकायत आ रही हैं।
नवीन मिश्रा, सहायक निदेशक मत्स्य
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें