सीओ परमानंद कुशवाहा ने बताया कि इस मामले में सात वर्ष से कम सजा होने के कारण अभी गिरफ्तारी नहीं की गई है। मंगलवार को मां विंध्यवासिनी का दर्शन-पूजन करने अलीगढ़ से आए एक परिवार ने आरोप लगाया था कि पूजा कराने के दौरान उनकी बहू के साथ कमरा बंद कर राज मिश्रा ने छेड़खानी की है।
मां विंध्यवासिनी मंदिर
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जिलाधिकारी दिव्या मित्तल के निर्देश पर बुधवार को विंध्याचल में लगे छेड़खानी के आरोपी पंडा का राज्याधिकारी पदनाम से लिखा बोर्ड प्रशासनिक अधिकारियों ने हटवा दिया। इसके साथ ही जिलाधिकारी ने अधिकारियों से कहा है कि वे वीआईपी को अपने स्तर से दर्शन-पूजन कराना सुनिश्चित करें। डीएम ने यह भी कहा है कि यदि कोई वीआईपी अपनी इच्छा से किसी तीर्थ पुरोहित के यहां जाना चाहता है तो उसके लिए वह स्वतंत्र है।
सिटी मजिस्ट्रेट की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि इसी राज्याधिकारी पंडा अथवा राज्य पुरोहित के लिए पांच वर्ष पहले दुर्गाशंकर पाठक की शिकायत पर तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट देवेंद्र प्रताप मिश्र ने जांच की थी। जिलाधिकारी को संबोधित उनकी जांच रिपोर्ट में कहा गया था कि इस तरह का कोई पद नहीं है। उसमें स्पष्ट रूप से प्रशासनिक स्तर से राजा पंडा का नाम उल्लिखित करते हुए कहा गया था कि उनको प्रशासनिक स्तर से इस प्रकार का कोई पद नहीं दिया गया है। उसमें इस बात का भी जिक्र किया गया था कि इस पद का जिक्र करके लोगों को बरगलाया जा रहा है।
इससे मंदिर की व्यवस्था प्रभावित हो रही है। इसी प्रकार तत्कालीन धाम चौकी प्रभारी राकेश कुमार वर्मा ने भी पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर सूचित किया था कि इस प्रकार का कोई पद मंदिर में नहीं है। जो अधिकारी जहां जाना चाहते हैं, वहां जाकर संबंधित पंडा के साथ दर्शन करते हैं। जो कहीं नहीं जाते हैं, उनको विंध्य विकास प्राधिकरण के ईश्वर शरण त्रिपाठी दर्शन कराते हैं। उधर, जांच के कुछ दिन बाद फिर से पुराने ढर्रे पर कार्य शुरू हो गया। विभिन्न जिलों से आने वाले प्रशासनिक अधिकारियों व वीआईपी को यहीं का रास्ता दिखाया जाने लगा। जो आज तक जारी है।