लालगंज। उपरौध अधिवक्ता समिति के चुनावी समर में इस बार युवाओं की खामोशी टूटने लगी है। अब तक पर्दे के पीछे रहकर समीकरणों को देखने वाले युवा अधिवक्ता अब मुखर होकर मैदान में उतर आए हैं। युवा अधिवक्ताओं का मानना है कि काम को तरजीह देना चाहिए। अब चुनावी बिसात पर पुराने समीकरण कमजोर पड़ रहे और युवाओं की नई रणनीति हावी होती दिख रही है। तहसील परिसर की चाय की दुकानों से लेकर चेंबरों तक अब केवल एक ही पैमाना चर्चा में है। प्रत्याशियों की कार्यशैली और अधिवक्ता हितों के प्रति उनका समर्पण। युवा अधिवक्ता अब केवल परिचय या औपचारिक संबंधों के आधार पर मतदान करने के मूड में नहीं हैं। 24 जनवरी को होने वाले मतदान को लेकर युवाओं की यह सक्रियता दिग्गजों की चिंता बढ़ा रही है। बताया जा रहा है कि युवा अधिवक्ताओं का एक बड़ा वर्ग एकजुट होकर मतदान करने की योजना बना रहा है। जिससे उनका मत निर्णायक साबित हो सके। कुल मिलाकर उपरौध अधिवक्ता समिति का यह चुनाव अब वरिष्ठता बनाम युवा सोच के दिलचस्प मोड़ पर आ खड़ा हुआ है।