संवाद न्यूज एजेंसी
मिर्जापुर। दो दिन हल्की धूप से राहत के बाद चार साल बाद तीन फरवरी को फिर से मौसम का मिजाज बदल गया। मंगलवार को दोपहर बाद चली तेज हवाओं और बूंदाबादी ने ठंड बढ़ा दी। अधिकतम और न्यूनतम तापमान में एक-एक डिग्री सेल्सियस की गिरावट आई। बूंदाबांदी और ठंड से सड़कों पर चहल-पहल कम रही।
मौमस विभाग से मिली जानकारी के अनुसार चार साल पहले तीन फरवरी को कोहरे और बादलों के साथ ही लोगों को तेज हवाओं और बूंदाबादी का सामना करना पड़ा था। मंगलवार को सुबह चटख धूप रही। धूप से लोगों को गर्मी का एहसास हुआ। मौसम बदलने का लोग कयास लगा रहे थे कि 12 बजे के बाद अचानक बादलों के बीच उठी तेज हवाओं से मौसम का मिजाज बदल गया। बादलों से धुंध बनी रही। दोपहर बाद शाम चार बजे हुई बूंदाबादी से ठंड और गलन बढ़ गई। चार दिन पहले सुबह लोग घने कोहरे से परेशान रहे। मंगलवार को अधिकतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 11 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पहले सोमवार को अधिकतम 24 और न्यूनतम तापमान 12 डिग्री सेल्सियस दर्ज की गई। बीएचयू वाराणसी के मौसम वैज्ञानिक शिव मंगल सिंह ने बताया कि स्थानीय बाधा के चलते बादल छाए हैं। इसके चलते कहीं-कहीं बूंदाबांदी हो सकती है। लेकिन तेज बारिश की संभावना नहीं है। लेकिन एक, दो दिन फिर से कोहरे का सामना करना पड़ सकता है।
इनसेट
शाम को सड़कों पर पसरा सन्नाटा, खेती किसानी पर विपरीत असर
तेज हवाओं के बीच हल्की बारिश से सड़कों पर फिसलन बढ़ गई। पानी थमते ही ठंड के बीच लोग ठिठुरते अपने-अपने घरों की ओर भागते दिखे। शाम होते ही दुकानों के शटर गिर जाने से सड़कों पर सन्नाटा पसर गया। बेमौसम बारिश से किसान भी चिंतित हो उठे। शीतलहर व पाला के चलते आलू की फसल बर्बाद हो चुकी है। दलहन और तिलहन फसलों पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। किसानों का मानना है कि यदि तेज बारिश हुई तो बचे खुचे आलू भी सड़ जाएंगे। जिगना, छानबे क्षेत्र में हल्की बारिश से जहां कुछ फसलों को फ़ायदा हुआ वहीं ठंड भी बढ़ गई। तीन दिन से कोहरा धूप छांव के बाद हुई बारिश से तापमान में गिरावट आ गई।
विंध्याचल धाम में मौसम से गिने चुने लोग नजर आए
विंध्याचल: बूंदाबादी से मां विंध्यवासिनी मंदिर परिसर में फिसलन बढ़ी रही। शाम को विंध्य कॉरिडोर में गिनेचुने लोग ही नजर आए। हलिया, क्षेत्र में कुछ स्थानों पर मंगलवार को गरज चमक के साथ हो रही हल्की बारिश से किसानों के होश उड़ गए। वही ठंड बढ़ने से वृद्धों तथा मजदूर एवं पशुओं के सामने समस्या खड़ी हो गई है। सुरेश दुबे, माधो लाल, शंकर लाल, भगवती प्रसाद दुबे व उमाकांत द्विवेदी ने बताया कि बारिश के बीच यदि ओले पड़े तो फसल बर्बाद हो जाएगी।