शिक्षा विभाग लखनऊ के असिस्टेंट कमिश्नर अंबेश कुमार के नेतृत्व में एक टीम शुक्रवार को जवाहर नवोदय विद्यालय में दूषित खाने से बीमार हुए बच्चोें के मामले की जांच करने पहुंची। टीम ने छात्र छात्राओं के हास्टल पहुंच कर उनके स्वास्थ्य के बारे में जाना। इसके बाद उनसे पूरे मामले की जानकारी ली। कहाकि बच्चों द्वारा दिए गए बयान से विद्यालय प्रशासन की घोर लापरवाही सामने आ रही है।
नवोदय विद्यालय में दूषित खाना खाने से 90 से अधिक बच्चों के बीमार होने की खबर लगते ही अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। जिले से लेकर प्रदेश तक अधिकारी हैरान हो गए। मामला प्रदेश तक पहुंचने पर घटना के दूसरे दिन शिक्षा विभाग लखनऊ के सहायक आयुक्त अंबेश कुमार टीम के साथ नवोदय विद्यालय धमक पड़े। दोपहर बाद विद्यालय पहुंचते ही सबसे पहले उन्होंने हास्टल की ओर रुख किया।
बीमार बच्चों से बातचीत करते हुए घटना की जानकारी ली। इसके बाद मेस को देखने गए। मेस में कार्यरत कर्मियों से पूछताछ की। भंडारण को भी देखा। वहां रखी खाद्य पदार्थ की सैंपलिंग कराई। विद्यालय और मेस की हालत देखकर उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने माना कि इसमें घोर लापरवाही बरतती गई है। जांच में दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि नवोदय विद्यालय की इतनी बड़ी घटना है।
इसमें किसकी चूक से यह घटना घटी इसकी भी जंाच कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि बिना टेंडर वाले व्यक्ति से दही खरीदा गया है। जिसका टेंडर था उससे दही नहीं लिया गया। खरीदे गए दही की जांच भी नहीं की गई। इससे लगता है कि कहीं न कहीं विद्यालय प्रशासन द्वारा लापरवाही बरती गई है।
जिलाधिकारी कंचन वर्मा शुक्रवार दोपहर जवाहर नवोदय विद्यालय पटेहरा पहुंचीं। उन्होंने रसोईघर, भंडार, छात्रावास का निरीक्षण किया। मेस में गंदगी पर नाराजगी जताई। विद्यालय प्रबंधन ने उनसे सरस्वती पूजा के प्रसाद के रूप में वितरित चरणामृत में इस्तेमाल दही को दूषित बताया। इस पर जिलाधिकारी ने कहा कि पहले अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाए और जांच में जो भी खाद्य सामग्री दूषित पाई जाती है, उसके आपूर्तिकर्ता के खिलाफ मुकदमा तरमीम कर लिया जाए।
जिलाधिकारी दोपहर करीब 12 बजे नवोदय विद्यालय का निरीक्षण करने पहुंची। उन्होंने सभी बीमार बच्चों को बाहर बुला कर उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली। डीएम से छात्रों ने शिकायतों की झड़ी लगा दी। उन्होंने कहा कि हास्टल के खिड़की, दरवाजे आदि की मरम्मत नहीं कराई जाती। बाद में जिलाधिकारी ने परिसर का निरीक्षण किया। छात्राओं व छात्रों के हास्टल को देखा। जिनमें गंदगी पाई गई।
विद्यालय के अधिकारियों ने डीएम को बताया कि एक फरवरी को बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा थी। उसमें चरणामृत के लिए मड़िहान के देवरी गांव निवासी रवि से दही खरीदी गई थी। उसी को पीने से बच्चे बीमार हुए। उनके तर्क को खारिज करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि खाद्य पदार्थों के सैंपल लिए गए हैं।
पहले अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा और जांच रिपोर्ट आने के बाद उसे नामजद किया जाएगा। एसडीएम चंद्र पाल तिवारी, बीडीओ दिनेश सिंह, खंड शिक्षा अधिकारी रहे।