बीएचयू के राजीव गांधी दक्षिणी परिसर में संगोष्ठी के दौरान पुस्तक का विमोचन किया गया।
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मनीपाल विश्वविद्यालय जयपुर के प्रबंधन एवं वाणिज्य स्कूल के निदेशक प्रो. सोराब साद्री ने शुक्रवार को कहा कि कौशल विकास न सिर्फ देश के विनिर्माण क्षेत्र को गति प्रदान कर सकता है, बल्कि मेक इन इंडिया की सफ लता के लिए भी आवश्यक है।
प्रो. साद्री बरकछा स्थित राजीव गांधी दक्षिणी परिसर में दीनदयाल उपाध्याय कौशल केंद्र द्वारा आयोजित मेक इन इंडिया - समस्याएं एवं संभावना विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि देश में कुशल श्रमिकों एवं कारीगरों की भारी कमी है। कौशल विकास अर्थ, व्यापार, प्रबंधन जैसे सभी क्षेत्रों के लिए जरूरी है। कहा कि दीनदयाल उपाध्याय कौशल केंद्र के कार्यक्रम और व्यवसायिक पाठ्यक्रम बेरोजगारों के लिए लाभकारी हैं। विशिष्ट अतिथि और वाणिज्य संकाय प्रमुख प्रो. आशाराम त्रिपाठी ने उच्च शिक्षण संस्थानों विशेष कर विश्वविद्यालय में कौशल विकास से जुड़े कार्यक्रमों की उपयोगिता बताई।
उन्होंने कौशल विकास को व्यक्तित्व विकास के लिए आवश्यक बताया। साथ ही विश्वविद्यालयों में ऐसे कार्यक्रमों को जनोपयोगी बताया। उन्होंने विद्यार्थियों को उद्योग और व्यवसाय शुरू करने के लिए जोखिम उठाने का सामर्थ्य रखने के लिए कहा। आचार्य प्रभारी प्रो. आरपी शुक्ल ने कार्यक्रम की रूपरेखा की जानकारी दी।
आयोजन सचिव डॉ. रत्नशंकर मिश्र ने पाठ्यक्रमों को कौशलपरक और रोजगारपरक बताया। कार्यक्रम के दो तकनीकी सत्र में 35 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। इसमें ई-शिक्षा से लेकर कौशल विकास द्वारा पर्यटन प्रबंधन, साड़ी उद्योग, कालीन उद्योग, ई-कामर्स और अन्य विषयों पर शोध पत्र प्रस्तुत किए गए।
इससे पहले सेमिनार सभागार में विश्वविद्यालय के संस्थापक और भारत रत्न महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर संगोष्ठी का उद्घाटन किया गया। संचालन डॉ. अनिल सिंह और धन्यवाद डॉ. मनोज कुमार सिंह ने दिया