प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सरोई में जांच करते डाक्टर। स्रोत- संवाद
मिर्जापुर। जिले में आठ सीएचसी और 40 पीएचसी में प्रतिदिन सात से आठ हजार मरीज इलाज कराने पहुंचते है। यहां प्राथमिक उपचार के बाद मरीजों को बेहतर उपचार के लिए मंडलीय अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। जनपद के सीएचसी-पीएचसी में नियमित के 63 और संविदा के आठ चिकित्सकों के पद रिक्त हैं। स्वास्थ्य की सबसे महत्वपूर्ण इकाई पीएचसी-सीएचसी है। जहां बीमार होने के बाद लोग सबसे पहले पहुंचते है। कहीं पर महिला डॉक्टर नहीं है तो कहीं पर बच्चे के डॉक्टर नहीं है। कहीं सर्जन तो कहीं हड्डी रोग विशेषज्ञ की कमी है।
जिले में नियमित डाक्टर के 171 पद हैं। इसमें 108 नियुक्त है। 63 पद खाली है। एक महीने पहले संविदा चिकित्सक के 47 पद थे। पांच पद हाल ही में और बढ़ाया गया है। इसके बाद संविदा चिकित्सक के पद 52 हो गए हैं। इस पर 47 डॉक्टर तैनात थे। कुछ दिन पहले तीन डॉक्टरों ने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद अब 44 डॉक्टर कार्यरत है। आठ पद रिक्त है। स्वास्थ्य विभाग की मानें तो रिक्त पदों पर विज्ञापन निकालकर भर्ती प्रकिया की जा रही है।
08 सीएचसी हैं जिले में
40 पीएचसी हैं जिले में
208 आयुष्मान आरोग्य मंदिर
215 एएनएम सेंटर
12 अर्बन पीएचसी
चुनार में हड्डी और लालगंज में सर्जन का पद रिक्त
चुनार सीएचसी में लगभग एक साल से सर्जन व हड्डी के डॉक्टर का पद रिक्त है। लालगंज सीएचसी में ऑर्थो, नेत्र और सर्जन चिकित्सक नहीं हैं। फार्मासिस्ट के चार पद रिक्त हैं। जिगना के पीएचसी विजयपुर सर्रोई में चिकित्सक के चार पद, राजगढ़ सीएचसी में दो चिकित्सक के पद खाली हैं।
दो साल से फार्मासिस्ट चला रहे पीएचसी, दो महीने के लिए मिले थे डॉक्टर
पटेहरा। संतनगर में दो साल से एक फार्मासिस्ट व एक वार्ड बॉय के सहारे पीएचसी का संचालन हो रहा है। यहां दो महीने के लिए डॉक्टर मिले थे। पटेहरा पीएचसी प्रभारी डॉ. अभिषेक जायसवाल ने बताया कि संतनगर पीएचसी पर दो महीने के लिए डॉक्टर मिले थे। इसके बाद से एलोपैथ के डॉक्टर का पद खाली है। कुछ दिन पहले एक आयुर्वेद के डॉक्टर की नियुक्ति की गई थी।
नियमित और संविदा के रिक्त चिकित्सकाें के पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया को समय-समय पर किया जा रहा है। कुछ समय पहले ही संविदा पर चिकित्सकों की नियुक्त की गई है।
डा. मुकेश कुमार, एसीएमओ