अप्रैल माह में उमस यह लोगों ने सोचा नहीं था। चैत्र में जेठ का अहसास होने से लोग आश्चर्य चकित हैं। सोमवार को गर्मी का आलम यह रहा कि अधिकतम तापमान 41.4 पहुंच गया। हालत यह रही कि सौ कदम पैदल चलने पर ही माथे पर पसीने की बूंदे छलकने लगी हैं। इससे फसलों पर बुरा प्रभाव पड़ने की आशंका जतायी जा रही है।
अप्रैल माह में पिछले वर्ष लोग घरों में कूलर लगाने के बारे में सोच रहे थे। पिछले वर्ष दस अप्रैल को बारिश होने के कारण मौसम में नमी आ गई थी और पंखे भी ठंडी हवा दे रहे थे लेकिन इस वर्ष पंखे आग उगल रहे हैं। अधिकांश घरों में कूलर और एसी चालू कर दिए गए हैं। मौसम की इस बेरुखी से गंगा भी अपना किनारा छोड़ चुकी हैं।
गंगा में रेत की चादर दिखाई पड़ने लगी है। जब यह हाल अप्रैल माह में है तो आने वाले दिनों में क्या होगा यह सोचा जा सकता है। उधर कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि यह गर्मी जायद की फसलों के लिए हानिकारक होगा। बीएचयू के दक्षिणी परिसर के कृषि वैज्ञानिक डा. श्रीराम सिंह बताते हैं कि यदि इसी प्रकार की गर्मी पड़ती रही तो पौधे झुलस कर खराब हो जाएंगे।
कहा कि ऐसे में किसानों को दिन के बजाय रात में सिंचाई करनी चाहिए ताकि पौधों को सुबह अच्छी नमी मिल जाय। सुबह सिंचाई करने से धूप में पौधों के जड़ में जमा पानी उबल कर पौधों को नुकसान पहुंचाएगा।