कजरी तीज पर जगह-जगह रतजगा हुआ। महिलाओं ने जलेबा खाकर रात भर कजरी गायन किया। तरह-तरह के खेल खेलकर जागरण किया। गलियों और सड़कों पर सारी रात कजरी उत्सव की धूम देखने को मिली। देवी विंध्यवासिनी की आराधना की। सुबह जरई उखाड़कर तालाब में धोकर भाइयों के कान पर रखी और उनके विजय और सफलता की कामना की। कजरी का उत्सव की रविवार को दूसरे दिन भी धूम रही।
दिन में जगह-जगह झूले डाले गए और युवतियों ने खूब पींगे भरीं। झूला-झूलने के दौरान खूब कजरी गाई गई। हंसी ठिठोली होती रही। कुल मिलाकर कैसे खेले जइबू सावन में कजरिया...बदरिया घेरि आइल ननदी की गूंज जिले भर में सुनाई देती रही।