मिर्जापुर। मतगणना एजेंट के लिए कोरोना की जांच की निगेटिव रिपोर्ट अनिवार्य होने के बाद जिले के सभी जांच केंद्रों पर एजेंटों की भीड़ उमड़ पड़ी। नगर के मंडलीय अस्पताल और घंटाघर में सुबह सात बजे से ही लोग लाइन में लग गए पर जांच सुबह 10 बजे तक शुरू नहीं हो सकी थी। जांच केंद्र पर भीड़ देखकर कहीं से नहीं लग रहा था कि इस समय कोरोना संक्रमण काल है। इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग नहीं दिखाई दी। हाल ये रहा कि भीड़ में लोग दबे रहे।
चुनाव के दौरान भी कोविड-19 की गाइड लाइन का पालन नहीं हो सका था।
अब मतगणना के समय एजेंट के लिए कोविड-19 की निगेटिव रिपोर्ट अनिवार्य कर दी गई है। सैकड़ों पदों पर हजारों प्रत्याशियों के एजेंट हैं, जिनको कोविड की जांच करानी है। जिनकी रिपोर्ट निगेटिव होगी, उनको ही मतगणना स्थल पर अनुमति मिलेगी। मंडलीय अस्पताल, घंटाघर, रेलवे स्टेशन व जिले के सभी सीएससी पीएससी पर कोरोना जांच की जा रही है। हर केंद्र पर जांच कराने के लिए एजेंटों की भीड़ उमड़ी हुई है। घंटाघर, मंडलीय अस्पताल में सुबह सात बजे से ही लोग पहुंचे रहे, पर 10 बजे तक जांच प्रक्रिया नहीं शुरू हो सकी थी। इसको लेकर लोग हंगामा करते रहे।
घंटाघर और मंडलीय अस्पताल ही नहीं बल्कि जिले के अन्य ब्लाकों में जांच केंद्र पर उमड़ी भीड़ और उनके वाहनों के खड़े होने के चलते आसपास के मार्ग पर जाम लग गया था। घंटाघर मार्ग पर सुबह से लेकर दोपहर तक जाम की स्थिति बनी रही। एजेंट तो परेशान ही, सड़क पर राहगीरों को भी जांच के चलते परेशानी का सामना करना पड़ा।
बंदी के दौरान जरूरी काम से भी बाहर निकले लोगों को पुलिस रोकती है। मास्क आदि न लगाने पर जुर्माने का भी प्रावधान है, पर जांच केंद्र पर कोविड नियमों का धता बताते हुए उमड़ी भीड़ को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराता कोई पुलिसकर्मी नहीं दिखाई दिया।