शेरवां। पिछले दो, तीन दिन हुई बारिश के बाद से ही क्षेत्र में हुए जल भराव से कई खेतों में फसलें पानी में डूब गई है। शुक्रवार को भी बिन बरखा के क्षेत्र में नाले उफान पर हैं। जबकि नहरों, नालो, ड्रेनो, राजबाहो में अहरौरा जलाशय से पानी भी नहीं छोड़ा गया है। इसके बावजूद क्षेत्र का यह हाल देखकर किसान बाढ़ के भय से सशंकित है। किसानों का मानना है कि यदि तेज बारिश के बीच अहरौरा जलाशय से पानी छोड़ा जाता है तो फिर क्षेत्र का भगवान ही मालिक है। अहरौरा जलाशय पर तैनात अवर अभियंता नरसिंह मौर्य ने बताया कि जलाशय में अभी जलस्तर 360 के सापेक्ष 340 फिट है। इसके बावजूद हुसेनपुर रजवाहा से जुड़े नाले उफान पर हैं। भोकानाला, वियरही ड्रेन, मुड़हुआ ड्रेन के उफान से धान की फसलें डूब गई हैं। तो कहीं-कहीं पानी के दबाव के चलते भोकानाला का तटबंध टूट गया है। भोकरौध, मनऊर गांव के निचले हिस्सो में पानी का दबाव बढ़ने से धान की रोपी गई फसल डूब गई है। हालांकि अहरौरा बांध से संचालित मुख्य रजवाहा हुसेनपुर के चौकिया ब्रांच शेरवां ब्रांच की नहरों में बांध का पानी नहीं आ रहा है। बावजूद बरसाती पानी से निचले हिस्से में पानी का दबाव बढ़ता जा रहा है। क्षेत्र के भाईपुर, भोकरौध, बिक्सी, ककरही, चौकिया, मनई, मनउर, गौरी, चैनपुरा, चरगोड़ा इलाके में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। चैनपुरा, चौबेपुर में भोकानाला का तटबंध टूट जाने से पानी सीवान में बह रहा है। किसानों का मानना है कि यदि तेज बारिश हुई और अहरौरा जलाशय से पानी छोड़ा जाता है तो एक बार फिर से बड़ी मात्रा में फसलें डूब सकती हैं। लगभग पांच हजार हेक्टेयर में रोपी गई धान की खेती बर्बाद हो सकती है।