राजमहल जलपोत से बुधवार को आए सैलानियों ने चुनार में बाबू देवकीनंदन खत्री की तिलिस्मी दुनिया को जाना-समझा। ऐतिहासिक चुनार गढ़ के अलावा उन्होंने बाबा कासिम सुलेमानी की दरगाह शरीफ, आंग्ल कब्रिस्तान, इफ्तखार खां का रौजा देखा। उनके ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व को जाना।
जलमार्ग से पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पोत परिवहन मंत्रालय की ओर से संचालित जलपोत राजमहल से 21 विदेशी महिला एवं पुरुष पर्यटक बुधवार को वाराणसी से चुनार के बालूघाट पहुंचे। उनके साथ पोत परिवहन मंत्रालय के निदेशक एके मिश्रा और चेयरपर्सन नूतन गुहा भी थे। पर्यटकों के दल ने प्राचीन टेराकोटा की कला एवं पॉटरी कला को देखा। दरगाह में कालीन एवं दरी बुनकरों से मुलाकात की। उनके हुनर के बारे में जानकारी हासिल की। पर्यटक दल के साथ में मौजूद डिप्टी डायरेक्टर अरविंद कुमार एवं हरिओम ने बताया कि सैलानियों में दो जापान, एक ऑस्ट्रेलिया एवं 18 ब्रिटिश नागरिक दल में शामिल हैं। उन्होंने बताया कि भारत में जल पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मंत्रालय हर साल क्रूज का संचालन करता है।
किला भ्रमण के दौरान जापान की शिक्षक इरिकोक एवं उनकी साथी कुरनोव ने राजा भर्तृहरि की समाधि सोनवा मंडप की तारीफ करते हुए कहा कि कई इमारतें काफी जर्जर हो चुकी हैं, जिनको दुरुस्त किया जान चाहिए। इंग्लैंड के मिस्टर तुंग ने कहा किला बेहद खूबसूरत है। उसका रिवरव्यू बेमिसाल है। किले के अंदर बाबली का मुंडेर गिर रही है। करीब चार घंटे तक पर्यटकों ने चुनार के पर्यटन स्थलों का नजारा लिया और तस्वीरें कैमरे में कैद कीं। टेराकोटा पाट को यादगार के रूप में साथ ले गए। दल जल परिवहन के बाद चुनार बालूघाट से तीन मिनी बस द्वारा सड़क मार्ग से पर्यटन स्थलों को देखने पहुंचे। शुभंकर, कुणाल एवं अखिलेश ने सैलानियों का पथदर्शन किया।