13- कछवां स्थित बैंक परिसर में पैसा नहीं मिलने पर विरोध करते ग्राहक।
नोटबंदी के बाद उपजा संकट समाप्त होने का नाम नहीं ले रहा है। बैंकों में कैश का संकट इस कदर बढ़ रहा है कि लोगों का धैर्य जवाब देने लगा है। शुक्रवार को कछवां में बैंक आफ बड़ौदा में उपभोक्ताओं ने कैशियर और शाखा प्रबंधक के खिलाफ जम कर नारेबाजी की। शुक्रवार को भी स्टेट बैंक के करेंसी चेस्ट से नगदी नहीं मिलने के कारण बैंकों को कैश बांटने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
दिसंबर का प्रथम सप्ताह होने के चलते बैंकों में पेंशन और वेतन की रकम निकालने वालों की भीड़ जमा हो रही है, लेकिन बैंकों में नगदी का संकट छाया है। जिले में स्टेट बैंक को करेंसी चेस्ट बनाया गया है। चुनार में स्थित स्टेटे बैंक के करेंसी चेस्ट से 14 बैंकों को और मिर्जापुर में स्थित करेंसी चेस्ट से 17 बैंकों को कैश का वितरण किया जाता है लेकिन शुक्रवार को नगदी नहीं मिलने से बैंक लोगों को पर्याप्त मात्रा में नगदी नहीं दे सके। किसी को दो हजार तो किसी को पांच हजार दे कर किसी तरह काम चलाया गया।
उधर कछवां में बैंक आफ बड़ौदा में सुबह आठ बजे से ही ठंड में रुपये निकालने के लिए लोग लाइन में लग गए थे। बैंक खुलने के बाद वहां तैनात एक पुलिसकर्मी कुछ लोगों को अंदर ले गया। 12 बजे के बाद बैंक में घुसे अन्य लोगों को कैशियर के कहने पर बाहर निकाला जाने लगा तो लोगोें का गुस्सा फूट पड़ा। लोग बाहर निकल कर कैशियर और शाखा प्रबंधक के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। उपभोक्ताओं का आरोप है कि बैंककर्मी अपने परिचित लोगों को कैश उपलब्ध करा रहे हैं। एक घंटे तक लोगों ने बैंक के गेट को घेरे रखा। न तो किसी को अंदर आने दिया गया और न ही किसी को बाहर जाने दिया गया। बाद में शाखा प्रबंधक द्वारा यह बताने पर कि कैश वैन आ गई है सबको नगदी दी जाएगी लोग मान गए।