जिले में कागजों पर ही गेहूं खरीद हो रही है। विगत वर्ष किसान क्रय केंद्रों पर गेहूं बेंचने के लिए दौड़ लगा रहे थे तो आज उसके विपरीत क्रय केंद्र प्रभारी गेहूं बेचने के लिए किसानों के घर जाकर मिन्नतें कर रहे हैं, लेकिन बाजार में अधिक मूल्य मिलने के कारण किसान टस से मस नहीं हो रहे हैं। गेहूं खरीद की रफ्तार से जिले में शासन द्वारा निर्धारित लक्ष्य पूरा होने पर संशय बना हुआ है।
गेहूं खरीद के लिए जिले में 53 केंद्र बनाए गए हैं। जिसमें 11 खाद्य विभाग, 22 पीसीएफ, चार कर्मचारी कल्याण निगम, चार सहकारी समिति, पांच एग्रो, चार नेकाफ, तीन भारतीय खाद्य निगम के केंद्र बनाए गए हैं। इन केंद्रों पर 64 हजार एमटी गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा गया है। गेहूं खरीद का समर्थन मूल्य 1525 रुपये बाजार भाव से काफी कम है, इसलिए किसान क्रय केंद्र की तरफ रुख हीं नही कर रहे हैं। जिससे केंद्रों पर गेहूं खरीद नहीं के बराबर हो रही है। विभागीय आंकड़ों की मानें तो खाद्य विभाग द्वारा 1223 एमटी, पीसीएफ द्वारा 699 एमटी, कर्मचारी कल्याण निगम द्वारा 56 एमटी, सहकारी समिति द्वारा 209 एमटी, एग्रो द्वारा 55 एमटी, नेकाफ द्वारा 23 एमटी और भारतीय खाद्य निगम द्वारा 58 एमटी सहित लगभग 2325 एमटी गेहूं खरीद जिले में अभी तक हो सकी है।