मिर्जापुर। विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट ज्ञानेंद्र राव की अदालत ने शनिवार को विवेचना में लापरवाही उजागर होने पर विवेचक के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस अधीक्षक को निर्देशित किया। कृत कार्रवाई से 10 दिन के अंदर न्यायालय को अवगत कराने का निर्देश दिया है।
अभियोजन के अनुुसार थाना चुनार क्षेत्र की निवासी कक्षा पांच की छात्रा के साथ अश्लील हरकत के साथ, गलत नीयत से निर्वस्त्र करने का मामला पंजीकृत किया गया था। इसमें विवेचना पुलिस उप निरीक्षक शाहिद खां कर रहे थे। विवेचक ने विवेचना में घोर लापरवाही बरतते हुए आरोपित को लाभ पहुंचाने को वादी मुकदमा व पीड़िता के 164 के बयान को पूर्ण रूप से नजरअंदाज करते हुए कम सजा की धारा में आरोप पत्र न्यायालय में दिया। आरोपी मुनाऊ साहनी के विरुद्ध धारा 354क के तहत विवेचना की। जबकि यह विवेचना 354 ख में परिभाषित अपराध स्पष्ट रूप से बनती है, जो गैर जमानतीय है। विवेचक उप निरीक्षक शाहिद खां द्वारा विवेचना में लापरवाही बरतते हुए वादी मुकदमा का बयान अंकित नहीं किया गया। न ही पीड़िता के फटे कपड़े को बरामद किए जाने का कोई प्रयास किया गया। इसका संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने तथ्य के सभी साक्षी के जरिए समन पुन: तलब करने, पत्रावली वास्ते साक्ष्य 19 फरवरी को पेश करने के आदेश के साथ पुलिस अधीक्षक मिर्जापुर को निर्देशित किया कि विवेचक शाहिद खां के विरुद्ध कृत कार्रवाई दस दिनों के अंदर न्यायालय को अवगत कराएं। साथ ही उन्हें इस आशय का नोटिस जारी किया जाए कि क्यों न उन्हें विधिक प्रशिक्षण के लिए पुलिस ट्रेनिंग सेंटर मुरादाबाद भेज दिया जाए।