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सूर्योपासना पर्व के लिए खरीदारी

Tue, 17 Nov 2015 12:26 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला मिर्जापुर
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 डाला छठ महापर्व के तहत सोमवार की शाम को महिलाओं ने रोटी व बखीर खाकर खरना किया। तत्पश्चात महिलाओं ने निर्जला व्रत शुरू कर दिया। संतान प्राप्ति, उनकी दीर्घायु एवं सुख-समृद्घि की कामना के साथ व्रत रखने वाली महिलाओं में व्रत को लेकर काफी उत्साह दिखा। इसके पूर्व नगर के बाजारों में पहुंच कर महिलाओं ने पूजन से संबंधित सामानों की बची-खुची खरीददारी भी पूरी कर ली, जिसके चलते नगर के बाजार गुलजार रहे।
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सूर्योपासना के महापर्व डाला छठ के मद्देनजर सोमवार को घरों में साफ-सफाई सहित पकवान बनाने का कार्य किया गया। शाम को महिलाओं ने रोटी और बखीर ग्रहण कर निर्जला व्रत शुरू कर दिया। कार्तिक मास में होने वाले सूर्य की उपासना का प्रमुख पर्व डाला छठ का सर्वाधिक महत्व पुराणों में वर्णित है। चार दिनों तक मनाए जाने वाले इस मपर्व के चौथे दिन प्रात:काल सूर्य को अर्घ्य देने के बाद पारण किया जाएगा। सोमवार को नगर क्षेत्र के प्रमुख बाजारों में पूजन से संबंधित सामानों की खरीदारी करने महिलाओं की भारी भीड़ जुटी रही। विंध्याचल के प्रख्यात ज्योतिषाचार्य पं. त्रियोगी नारायण मिश्र ने बताया कि मान्यता है कि भगवान सूर्य अपने उपासकों के संकट को दूर करते हुए रोग मुक्त व ऋण मुक्त बना कर सुखमय जीवन व्यतीत करने का शुभ आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
छठ का पर्व प्रत्येक वर्ष कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष के चतुर्थी से शुरू होकर सप्तमी तिथि के बीच मनाया जाता है। यह संसार का पहला ऐसा पर्व है, जहां उगते सूर्य की बजाय डूबते सूर्य की पूजा अर्घ्य के साथ होती है। यह व्रत चतुर्थ तिथि को सांय नहा कर चने की दाल व लौकी की सब्जी-चावल खाकर प्रारंभ किया जाता है और पुन: पंचमी तिथि को दिन भर उपवास रह कर सायंकाल भगवान को भोग लगा कर गुड़ की बखीर व रोटी ग्रहण किया जाता है। बताया कि षष्ठी तिथि निर्जला व्रत रहते हुए सायंकाल अस्ताचल सूर्य को अर्घ्य देने के बाद सप्तमी तिथि को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर हवन-पूजन के पश्चात व्रती महिलाएं अपना व्रत तोड़ती हैं।
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