गंगा अब रौद्र रूप धारण करने लगी हैं। सोमवार को खतरे का निशान पार कर गंगा का जलस्तर शाम छह बजे तक 78.08 मीटर पर पहुंच गया। छानबे, कोन, मझवां, सीटी, पहाड़ी, सीखड़ व नरायनपुर विकास खंड में तटवर्ती गांवों में बाढ़ का कहर जारी है। पानी सड़कों पर भर जाने से कई गांवों का संपर्क टूट गया है। लोगों के आवागमन के लिए नाव ही सहारा बना हुआ है।
सोमवार को दिन में दो बजे तक प्रति घंटे एक सेंटीमीटर की गति से गंगा के जलस्तर में वृद्धि जारी था। गंगा का जलस्तर खतरे का निशान पार कर शाम छह बजे तक 78.08 मीटर पहुंच गया। जिले में खतरे का निशान 77.724 मीटर है। नौ सितंबर 1978 को गंगा का जलस्तर 80.34 मीटर पर पहुंच गया था। इसी तरह 12 अगस्त 2021 को गंगा का जलस्तर 78.40 मीटर तक पहुंच गया था।
सदर तहसील के छानबे क्षेत्र में बाढ़ को देखते हुए ग्रामीण चिंतित हैं। गांवों के चारों तरफ पानी फैल रहा है। पशुपालक मवेशियों को लेकर रिश्तेदारों अथवा पहाड़ी की ओर जाने लगे हैं। बबुरा, जोपा, अकोढ़ी, श्रीनिवास धाम स्थित बाढ़ चौकियों पर तैनात कर्मचारी बाढ़ पर नजर रखे हुए हैं। बाढ़ से चेहरा, बजटा, काशीसरपत्ती, देवरी, मुतलिके गौरा, गोगांव, खैरा, मिश्रपुर, अकोढ़ी, बबुरा, बिरोही, अरंगी सरपत्ती, भटेवरा, कठवइया, बलापुर, कोठरा मिश्रान, डंगहर व गौरा सहित अन्य गांवों में फसलें पानी में डूब गई हैं। चेहरा, काशीसरपत्ती, बिरोही, महडौरा, कोठरा मिश्रान, देवरी आदि गांवों में निचले इलाके में बसे लोगों के घरों में पानी घुस गया है। कर्णावती नदी में पानी बढ़ने से भटेवरा-विजयपुर, अरगीसरपत्ती, महुआरी खुर्द, बरुआ मार्ग बंद हो गया है।
विकास खंड कोन में तटवर्ती गांव बाढ़ के पानी से पूरी तरह से घिर चुके हैं। फसलें पानी में डूब गई हैं। मझिगंवा, हरसिंहपुर, मल्लेपुर, तिलठी, मिश्रधाप, अनिरुद्धपुर पूरब पट्टी, अनिरुद्धपुर पश्चिम पट्टी में फसलें जलमग्न हो गई हैं। कोहड़ा, लौकी, नेनुआ, मिर्चा, बैगन, कद्दू सहित अन्य फसलें पानी में डूब गई हैं। सीखड़ विकास खंड के तटवर्ती गांवों में बाढ़ का पानी पहुंचने से फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है। फूलहा, नयापुरा, हासीपुर, धनैता, रामगढ़, बिदापुर, प्रेमापुर, सोनबरसा, खानपुर, मिसिर पुरा, विट्ठलपुर, लालपुर, गोरैया, भुवालपुर, सीखड़, मेड़िया, धनुपुर, पिपराही, मगरहा, अदलपुरा, बसारतपुर, कठेरवा व मुंदीपुर आदि गांवों में फसलें बर्बाद होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। पड़री क्षेत्र में गंगा के तटवर्ती गांवों कठनई, चंडिका, नान्हूपुर, कनौरा, सिंधोरा, सरैया, अकसौली, छटहां, चौहान पट्टी, रतनबो आदि में बाढ़ को लेकर ग्रामीणों में दहशत है। गंगा से जुड़ी नदियों का पानी खेतों तक पहुंच गया है। इससे फसलें पूरी तरह से जलमग्न हो गई हैं। चुनार नगर पालिका क्षेत्र में भरपुर मुहल्ला व कजिया गांव का संपर्क टूट गया है। रैपुरिया, नकहरा, गोविंदपुर गांव में भी लोगों के लिए अब नाव ही सहारा बना हुआ है। बाढ़ के चलते कैलहट के ढाब क्षेत्र के शिवपुर, बगही, चंदापुर, गोविंदपुर, भवानीपुर, धरम्मरपुर , चितरहा रामरायपुर, गांगपुर, बेला, पचेवरा , कैलहट, नकहरा में फसलें पानी में डूब जाने से पशुओं के समक्ष चारे का संकट पैदा हो गया है। नरायनपुर क्षेत्र में बाढ़ के चलते गंगा के तटवर्ती इलाकों में किसानों की फसलें पूरी तरह से पानी में डूब गई हैं। पशुओं के चारा के लिए किसानों के समक्ष संकट पैदा हो गया है। बहुत से किसान पशुओं के साथ सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं।
बरैनी गांव के मांझी बस्ती में घरों में बाढ़ का पानी घुस जाने से लोग सुरक्षित स्थान की तलाश में जुटे हुए हैं। अभी तक प्रशासन की ओर से कोई भी मदद नहीं पहुंचाए जाने लोगों में नाराजगी है। भटौली पुल के रास्ते बरैनी गांव के सामने कछवां-मिर्जापुर मार्ग पर बाढ़ का पानी भर गया है। बाढ़ की यही स्थिति रही तो जिला मुख्यालय की ओर आवागमन बंद हो सकता है। लोगों को 30 किलोमीटर अतिरिक्त चक्कर लगाकर औराई होते हुए मुख्यालय के लिए पहुंचना होगा।
उधर, केंद्रीय राज्यमंत्री व सांसद अनुप्रिया पटेल ने सोमवार को बाढ़ प्रभावित हरगढ़, गोगांव, जोपा, बबुरा, तिलईमौआर व खम्हरिया कला आदि गांवों का दौरा किया। बाढ़ की स्थिति व पानी में डूबे किसानों की फसलें देख एसडीएम सदर को यथाशीघ्र नुकसान की रिपोर्ट तैयार कराकर क्षतिपूर्ति दिलाने का निर्देश दिया। केंद्रीय मंत्री ने बाढ़ प्रभावित किसानों को इस दैवीय आपदा में शासन-प्रशासन से मदद दिलाने का भरोसा दिया। इस दौरान अपना दल एस के जिलाध्यक्ष इ. राम लौटन बिंद, एमएलसी प्रतिनिधि प्रेम बहादुर सिंह, स्वामी नाथ सिंह, राजेंद्र पाठक, जय सिंह, सुजीत मोदनवाल, अनिल सिंह, प्रीतेश सिंह, संजय उपाध्याय, पन्ना लाल पटेल, गोवर्धन सिंह आदि मौजूद रहे।