बाढ़ का कहर शनिवार को भी जारी रहा। जलस्तर में वृद्धि के चलते छानबे, कोन, मझवां, सीटी, पड़री, सीखड़ व नरायनपुर विकास खंड में गंगा के तटवर्ती कई गांवों में पानी पहुंच गया है। सड़कों पर पानी भर जाने से कुछ गांवों का संपर्क टूट गया है। गांव तक पहुंचने के लिए केवल नाव ही सहारा रह गया है।
शनिवार को शाम चार बजे प्रति घंटे एक सेंटीमीटर की रफ्तार से गंगा के जलस्तर में बढ़ाव जारी रहा। गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु पार कर 78.44 मीटर पहुंच गया है। जिले में खतरे का निशान 77.724 मीटर पर है।
जिगना क्षेत्र में बाढ़ की हालत देख तटवर्ती गांवों के लोगों की चिंता बढ़ गई हैं। खेत और खलिहानों को डूबोते हुए बाढ़ का पानी गांवों के चारों तरफ फैल रहा है। पशुपालक मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने लगे हैं। इस बीच अकोढ़ी, बबुरा, जोपा, श्रीनिवास धाम स्थित बाढ़ चौकियों पर तैनात कर्मचारी प्रभावित इलाकों में भ्रमण करते दिखे। क्षेत्र के चेहरा, बजटा, काशी सरपत्ती, देवरी, मुतलिके गौरा, गोगांव, खैरा, मिश्रपुर, अकोढ़ी, बबुरा, बिरोही, अरंगी सरपत्ती, भटेवरा, कठवइया, बलापुर, कोठरा मिश्रान, डंगहर व गौरा सहित अन्य गांवों में फसलें पानी में डूब गई हैं। चेहरा, काशीसरपत्ती, बिरोही, महडौरा, कोठरा मिश्रान, देवरी आदि गांवों में नीचे बसे लोगों के घरों में पानी घुस गया है। कर्णावती नदी में पानी बढ़ने से भटेवरा-विजयपुर मार्ग, अरगीसरपत्ती, महुआरी खुर्द, बरुआ मार्ग बंद हो गया है।
विकासखंड कोन में गंगा के तटवर्ती गांव बाढ़ के पानी से घिर चुके हैं। फसलें पानी में डूब गई हैं। मझिगंवा, हरसिंहपुर, मल्लेपुर, तिलठी, मिश्रधाप, अनिरुद्धपुर पूरब पट्टी, अनिरुद्धपुर पश्चिम पट्टी में अधिकांश खेत जलमग्न हैं। कोहड़ा, लौकी, नेनुआ, मिर्चा, बैगन, कद्दू सहित अन्य फसलें पानी में डूब गई हैं। पानी घरों में घुसने से लोग छतों पर रहने को लोग विवश हैं। सीखड़ विकास खंड के तटवर्ती गांवों में बाढ़ का पानी पहुंचने से फसलों का काफी नुकसान हुआ है। फूलहा, नयापुरा, हासीपुर, धनैता, रामगढ़, बिदापुर, प्रेमापुर, सोनबरसा, खानपुर, मिसिरपुरा, विट्ठलपुर, लालपुर, गोरैया, भुवालपुर, सीखड़, मेड़िया, धनुपुर, पिपराही, मगरहा, अदलपुरा, बसारतपुर, कठेरवा व मुंदीपुर आदि गांवों में फसलें बर्बाद होने से किसान चिंतित हैं। बाढ़ को देखते हुए घरों से धीरे-धीरे लोग अपना सामान समेटकर सुरक्षित स्थान की तलाश में लगे हुए हैं। बाढ़ को देखते हुए प्रशासन की ओर से अभी तक कोई राहत नहीं पहुंचाए जाने से ग्रामीणों में नाराजगी है।
पसियाही के पूर्व ग्राम प्रधान शिल्पी, जिला पंचायत सदस्य कृष्ण कुमार सिंह ने क्षेत्र का भ्रमण कर जायजा लिया। पड़री क्षेत्र में बाढ़ के चलते गंगा के तटवर्ती सिंधोरा, सरैया, कठनई, चंडिका, नान्हूपुर, कनौरा, अकसौली, छटहां, चौहान पट्टी, रतनबो आदि गांवों में ग्रामीण चिंतित हैं। इस बीच खंड विकास अधिकारी पहाड़ी पवन कुमार सिंह ने ने सिंधोरा स्थित बाढ़ चौकी का भ्रमण कर जायजा लिया। चुनार तहसील क्षेत्र में बाढ़ के चलते नगर पालिका के भरपुर मुहल्ले व कजिया गांव का संपर्क टूट गया है। भरपुर मुहल्ले के साथ ही रैपुरिया, नकहरा, गोविंदपुर गांव में भी लोगों के लिए अब नाव ही सहारा बना हुआ है। कैलहट क्षेत्र में गंगा नदी में लगातार पानी बढ़ने के कारण ढाब के शिवपुर, बगही, चंदापुर,गोविंदपुर, भवानीपुर, धरम्मरपुर, चितरहा रामरायपुर, गांगपुर, बेला, पचेवरा , कैलहट, नकहरा में फसलें पानी में डूब गई हैं। इससे पशुओं के लिए भी चारा की समस्या पैदा हो गई है। नरायनपुर ढाब क्षेत्र में बाढ़ के चलते किसानों की फसलें डूब गई हैं। पशुओं के चारा के लिए किसानों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। उधर, बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का चुनार विधायक अनुराग सिंह ने दौरा किया। बगही, जलालपुर माफी, नकहरा पहुंचे विधायक ने बाढ़ से प्रभावित फसलों के बारे में जानकारी ली। विधायक ने कहा जल्द ही बाढ़ से बर्बाद फसलों का मुआयना कराकर किसानों को मुआवजा दिलाया जाएगा। विधायक ने बाढ़ चौकियों पर तैनात कर्मचारियों को आपदा से निपटने के लिए मुस्तैद रहने के लिए कहा। इस दौरान रमेश सिंह, माता प्रसाद, अभिषेक, सुधाकर सिंह, जय सिंह, इं. धर्मराज सिंह, लक्ष्मण सिंह आदि मौजूद रहे। इसी तरह ब्लॉक प्रमुख नरायनपुर चन्द्र प्रकाश सिंह ने बाढ़ क्षेत्र का दौरा कर वस्तुस्थिति की जानकारी ली। इस दौरान संजय श्रीवास्तव, विजय कुमार सिंह, राकेश सिंह, पंकज सिंह आदि मौजूद रहे।
उधर, पहाड़ी विकास खंड में बेलवन गांव का विश्वकर्मा बस्ती पूरी तरह से बाढ़ के पानी से घिर गया है। आवागमन बंद होने से ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गांव में ज्यादातर श्रमिक वर्ग के लोग रहते हैं। कामकाज ठप होने से कई परिवारों के समक्ष भुखमरी का संकट पैदा हो गया है। पूर्व ग्राम प्रधान राजेश गौतम ने जिला प्रशासन से गरीबों के लिए राहत सामग्री के साथ ही नौका की व्यवस्था करने की मांग की है।
उधर, गंगा में शनिवार को करीब दो दर्जन मवेशियों का झुंड दिखाई दिया। जिसे देख पुल पर लोगों की भीड़ जुट गई। भटौली पुल के समीप केवटाबीर गंगा घाट के सामने टीले पर पिछले महीने से ही मवेशियों का झुंड फंसा हुआ था। जिसकी सूचना पर जिले से पहुंचे अधिकारियों की मौजूदगी में कुछ पशुओं को तो निकाल लिया गया और अन्य को छोड़ दिया गया था। शनिवार को दोपहर में गंगा में बहते मवेशियों का झुंड दिखा तो बीडीसी महात्मा निषाद के साथ अन्य नाविक उन्हें बचाव में जुट गए। मल्लाहों ने किसी तरह से मवेशियों को बाहर निकाला।