जीवन ऐसे ही मत बिताओ। सपने ऐसे बनाओ जिसमें देश के लिए कुछ कर सको।
छात्र अपने जीवन का लक्ष्य स्वयं निर्धारित करें। शिक्षा नौकरी के लिए नहीं, वरन आचरण और संस्कार को संरक्षित करने के लिए ग्रहण करें।
उक्त बातें बरकछा स्थित राजीव गांधी दक्षिणी परिसर के व्याख्यान संकुल में विश्व हिंदू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय संरक्षक अशोक सिंघल ने सोमवार को कहीं।
इस दौरान राजीव गांधी दक्षिणी परिसर का व्याख्यान संकुल भारत माता के नारों से गूंज उठा।
उन्होंने कहा कि मालवीय जी के चरणों में संस्कार मिलता है।
छात्र संकल्प लेकर देश को महाशक्ति बनाएं। मालवीय जी ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना सच्चे राष्ट्रभक्तों को उत्पन्न करने के लिए की।
श्री सिंघल ने कहा कि मालवीय जी स्वराज की लड़ाई के आगे की सोचते थे जबकि गांधीजी केवल स्वराज के बारे में सोचते थे।
अपने लिए उन्होंने कहा कि बीएचयू में पढ़ने के बावजूद बीते कई वर्षों से उन्हें यहां प्रवेश का मौका नहीं दिया गया।
कहा हिंदू समाज बहुत ही सहनशील है।
बोले, विहिप ही भारतीय संस्कृति की रक्षा कर सकती है। उन्होंने कहा कि आप स्वतंत्र हैं, ऐसा मत सोचिए।
आज भी हमारे वजूद को मिटाने का प्रयास हो रहा है। आईआईटी के नाम से 2011 में प्रस्ताव लाया गया।
उसके बाद 2013 में आईआईटी बनाकर विखंडन किया गया। कार्यक्रम को प्रांत संगठन मंत्री मनोज श्रीवास्तव ने भी संबोधित किया।
संचालन संजय सिंह ने किया। स्वागत भाषण विशेष कार्याधिकारी प्रो. रामप्रताप सिंह ने किया। इस मौके पर प्रो. रविप्रताप सिंह, शिव कुमार शुक्ला, प्रो. डीसी राय, लाल बहादुर सिंह, बीजेपी जिलाध्यक्ष अनिल सिंह, राजेश सिंह आदि मौजूद रहे।