संत मोरारी बापू ने शारदीय नवरात्र में अपने प्रवचन के छठवें दिन मनोहारी रामजन्म और जगत जननी कात्यायनी के सौम्य रूप की व्याख्या करते की। राम जन्म के उ्त्सव में मंच से टाफियां और खिलौने की बौछार कर दी गई।
बापू ने श्रीकृष्ण और राधा के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रेमियों और साधकों के लिए हर चिंतन सार्थक है। हमें सत्कर्म करना चाहिए क्योंकि अच्छे कर्मों से ही मोक्ष की प्राप्ति संभव है। दस महाविद्या त्रिपुर सुंदरी में अच्छे शब्दों का समावेश किया गया है। यदि आपके लिए कोई अच्छे शब्द बोले, तारीफ करे तो पहले देखें कि यह शब्द कहने वाला कौन है। योग्य व्यक्ति ही तारीफ करता है, अयोग्य तो केवल खिल्ली उड़ाता है। बापू ने कहा कि मानस में दो गुप्त पात्र हैं, तापस और तापसी। शक्ति के साधकों के लिए 10 महाविद्या त्रिपुरसुंदरी का ऊंचा स्थान है। जिसमें सभी गुणों, कला तथा शक्ति विद्यमान हो उसे ही श्रीदेवी कहा जाता है। दुर्ग बाहरी संकटों से बचाता है जबकि दुर्गा बाहरी और आंतरिक हर प्रकार से हमारी रक्षा करती हैं।
शिव के पार्वती केे रामकथा सुनाने का जिक्र करते हुए कहा कि बताया कि पहले रात होती है फिर सूर्य उगता है। पहले रावण का जन्म हुआ था और फिर सूर्यवंश में राम जन्मे। रावण की निर्दयता से संसार त्रस्त हो गया तो देवताओं के साथ पृथ्वी गाय के रूप में ब्रह्मा के पास पहुंची और समस्या बताई। ब्रह्मा कहने पर सबने परमात्मा की गुहार लगाई। उधर, राजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति के पुत्रयष्टि यज्ञ कर रहे थे। कौशल्या के गर्भ में हरि आए पूरे विश्व में खुशहाली छा गई। भगवान राम के जन्म प्रसंग के वर्णन के समय पंडाल में जयकारे गूंज उठे।
बापू पहुंचे भंडारा में
विंध्याचल। प्रभु श्रीराम भंडारे में पहुंच कर मुरारी बापू ने भंडारे में बने खाद्यान्न का जायजा लिया। भंडारे में मौजूद प्रभु प्रसाद बनाने वाले और भोजन ग्रहण करने वाले श्रद्धालु बापू को भंडारे में देख निहाल हो गए। श्रद्धालुओं में बापू का आशीर्वाद लेने की होड़ मच गई।
बापू ने पढ़ाया प्रेम का पाठ
विंध्याचल। शिवपुर के बिरला गेस्ट हाउस द्वारा संचालित विद्या मंदिर में बापू ने बच्चों को प्रेम और सत्य का पाठ पढ़ाया, जिसमें सभी बच्चों के चेहरे पर मुस्कान आ गया और बापू को पढ़ाते हुए देख वहां के अध्यापक खुश नजर आए।
सफल दांपत्य का सूत्र बताया
विंध्याचल। बापू सफल दांपत्य जीवन का सूत्र बताते हुए कहा कि पत्नी को केवल प्यार चाहिए और पति को आदर। कथा के बीच में एक वृद्ध महिला ने कई प्रश्न पूछे। बापू ने कहा कि जिसकी दृष्टि सुंदर होती है वही सुंदर दृश्य देख पाता है।