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सपा और मुस्लिम

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तीन दिवसीय दौरे के दौरान मिर्जापुर पहुंचे सपा मुखिया व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश आश्रम व मंदिरों में दर्शन पूजन तो करने पहुंचे पर दरगाह की दर भूल गए। जबकि मिर्जापुर आने वाले किसी भी पार्टी के राजनेता विंध्यवासिनी मंदिर में दर्शन पूजन करने के बाद कंतित शरीफ में मत्था टेकना नहीं भूलते। कंतित शरीफ में सपा मुखिया के स्वागत की जोरदार तैयारी की गई थी पर वह धरी की धरी रह गई। जहां कुछ लोग इसे पूर्व मुख्यमंत्री के टाइट शेड्यूल का नतीजा बता रहे हैँ तो वहीं राजनीति के जानकार इसे समाजवादी पार्टी की बदली रणनीति से जोड़कर देख रहे हैँ।
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अष्टभुजा डाक बंगला में शुक्रवार की रात विश्राम करने के बाद सुबह मिर्जापुर रवाना होने से पहले यह सूचना मिली की कंतित शरीफ की हजरत इस्माइल चिश्ती दरगाह पर अखिलेश यादव बाबा के मजार पर चादरपोशी करने के लिए पहुंचेंगे। लेकिन अखिलेश यादव का काफिला अष्टभुजा डाकबंगला से निकलते ही अमरावती चौराहा होते हुए सीधे मिर्जापुर शहर के लिए रवाना हो गया।
यूपी विधानसभा चुनाव 2022 की तैयारी में जुटे सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मूख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मिर्जापुर आगमन के दौरान सक्तेशगढ़ आश्रम में दर्शन पूजन किया तो वहीं मां विंध्यवासिनी देवी को कुलदेवी बताने के साथ ही दर्शन पूजन किया। विंध्याचल आने वाले किसी भी पार्टी के बड़े नेता सेक्युलरिज्म का संदेश देने के लिए मंदिर और दरगाह दोनों जगह जाते हैं। इससे पहले कांग्रेस पार्टी से राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी भी यहां आ चुके है। स्थानीय लोगों का कहना है। कि इससे पहले पूर्व पीएम इंदिरा गाँधी भी आ चुकी हैैं। शिवपाल यादव भी यहां मत्था टेक चुके हैं।
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