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कहीं शिक्षक तो कहीं विद्यार्थी नदारद

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जिले में संस्कृत विद्यालयों की दशा खराब है। कई जगह या तो शिक्षक नहीं हैं या फिर शिक्षार्थी नहीं हैं। कई विद्यालयों में तो एक भी शिक्षक नहीं हैं। रामभरोसे व्यवस्था चल रही है। कहीं उपली पाथी जा रही है तो कहीं ताला लटक रहा है।
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जिले में 20 संस्कृत विद्यालय संचालित हैं। इनमें पांच महाविद्यालय भी शामिल हैं। नगर के बरिया घाट स्थित श्री सनातन भैरव शंकर ब्रह्म संयुक्त संस्कृत महाविद्यालय में शिक्षकों के 10 पद स्वीकृत हैं, किंतु वर्तमान में केवल प्राचार्य नरेंद्र देव पांडे ही कार्यरत हैं। अध्यापक अवकाश प्राप्त कर चुके हैं। इस विद्यालय के माध्यमिक विद्यालय में 41 छात्र पंजीकृत हैं, जबकि महाविद्यालय में 49 छात्र हैं। प्राचार्य नरेंद्र देव पांडेय ने बताया कि उनके पास गोस्वामी तुलसीदास संस्कृत विद्यालय जमालपुर तथा ड्रमंडगंज स्थित संस्कृत महाविद्यालय का भी प्रभार है।
हलिया विकासखंड अंतर्गत राघव संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में तीन वर्ष पूर्व शिक्षकों के सेवानिवृत्त होने के बाद विद्यालय में ताला लटक रहा है। क्षेत्र के अहुंगी कलां ग्राम पंचायत के टिकुरी मोहल्ले में स्थित संस्कृत विद्यालय में लगभग तीन वर्षों से पठन-पाठन प्रभावित है। प्रधान अध्यापक शिव प्रताप तिवारी एवं शिक्षक कन्हैया लाल एवं अलगू प्रसाद मिश्र तीन वर्ष पूर्व सेवानिवृत्त हो गए। उसके बाद न तो किसी शिक्षक की नियुक्ति हुई और न ही विद्यालय खुल रहा है। पठन पाठन भी बंद है। विद्यालय भवन की हालत भी खराब है। इमिलिया चट्टी क्षेत्र के पटिहटा में हरिकिंकर संस्कृत उच्चतर विद्यालय स्थित है। विद्यालय में प्रधानाचार्य, एक सहायक अध्यापक समेत तीन पद हैं। विद्यालय में रिक्त पदों की संख्या दो है। प्रधानाचार्य श्रीकांत शुक्ला ने बताया 56 छात्र हैं। चुनार नगर के टेकौर मुहल्ले में स्थित श्रीमती भागीरथी ट्रस्ट आदर्श संस्कृत महाविद्यालय बंद चल रहा है। प्राचार्य व मात्र एक लिपिक के सहारे महाविद्यालय में पठन पाठन चल रहा है, जबकि यहां मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार व उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से छात्र शिक्षा अर्जन करने आते हैं। कछवा क्षेत्र के बरैनी में स्थित संस्कृत विद्यालय बंद चल रहा है।
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जिला विद्यालय निरीक्षक सत्येंद्र कुमार सिंह का कहना है कि संस्कृत विद्यालयों में शिक्षकों की समस्या है। मानदेय पर कई जगहों पर शिक्षक रखे गए हैं। व्यवस्था पटरी पर लाने की कोशिश की जा रही है।
उधर, विकास खंड के खैरा गांव में स्थित श्री जोखन राम संस्कृत विद्यालय शिक्षा विभाग की उदासीनता का शिकार है। 1914 में इस संस्कृत विद्यालय की स्थापना की गई थी। जून 2015 में प्रधानाचार्य राधेश्याम त्रिपाठी के रिटायर होने के बाद पूर्व प्रधानाचार्य को मानदेय पर विद्यालय में व्यवस्था बनाए रखने के लिए रखा गया था। लेकिन मानदेय न मिलने के चलते वे कार्य नहीं कर सके। उनके बाद से आज तक किसी भी अध्यापक की नियुक्ति उक्त विद्यालय नहीं की गई। प्रबंधकीय व्यवस्था के चलते 20 फार्म विद्यालय में भरे गए हैं, लेकिन विभागीय उपेक्षा के चलते संस्कृत विद्यालय की स्थिति काफी खराब हो चुकी है। भवन जर्जर हो गए हैं। परिसर में गांव के कुछ लोगों द्वारा उपली पाथी जा रहृी है।
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